दिल्ली के सरकारी विद्यालयों से पाँच छात्राएँ यूएस स्पेस एंड रॉकेट सेंटर में आयोजित प्रतिष्ठित अंतरिक्ष विज्ञान कार्यशाला में भाग लेने के लिये चुनी गई हैं। इस चयन में 400 से अधिक अभ्यर्थियों की दो‑स्तरीय कठोर प्रक्रिया शामिल थी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 5 दिल्ली सरकारी स्कूल की छात्राएँ यूएस स्पेस एंड रॉकेट सेंटर में कार्यशाला में भाग लेंगी।
  • 400 से अधिक उम्मीदवारों में से दो‑स्तरीय चयन प्रक्रिया के बाद चयन हुआ।
  • यह पहल महिला विज्ञान प्रतिभा को बढ़ावा देने और अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोज़र प्रदान करने का लक्ष्य रखती है।

नई दिल्ली – दिल्ली सरकार की सक्षम् पहल के अंतर्गत पाँच छात्राएँ, जो विभिन्न सरकारी एवं अर्ध-सरकारी स्कूलों से आती हैं, को यूएस स्पेस एंड रॉकेट सेंटर (SSRC) में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष विज्ञान कार्यशाला में भाग लेने के लिये चुना गया है। इस अवसर को दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने व्यक्तिगत रूप से टिकट सौंप कर साक्षी किया, जिससे राज्य में STEM शिक्षा को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता स्पष्ट हुई।

चयन प्रक्रिया और प्रतिस्पर्धा

कार्यक्रम में 400 से अधिक विद्यार्थियों ने भागीदार बनने के लिये आवेदन किया। पहले चरण में 130 छात्रों को प्रारम्भिक STEM मूल्यांकन और एक विस्तृत स्टेटमेंट ऑफ पर्पज़ (SOP) के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया गया, जिसमें उनके वैज्ञानिक जिज्ञासा, विश्लेषणात्मक सोच और STEM के प्रति जुनून को मापा गया। शॉर्टलिस्टेड छात्राएँ फिर एक क्षेत्रीय कार्यशाला में भागी, जहाँ उन्होंने हाथ‑से‑हाथ विज्ञान प्रोजेक्ट तैयार किए। अंतिम चरण में शीर्ष पाँच प्रोजेक्ट विचारों का चयन किया गया, और उन विचारों के पीछे की छात्राएँ इस प्रतिष्ठित कार्यशाला में प्रतिनिधित्व करने के लिये चुनी गईं।

कार्यशाला का स्वरूप और अपेक्षित लाभ

यह एक‑सप्ताह की कार्यशाला अक्टूबर‑नवंबर 2026 में आयोजित होगी, जहाँ चयनित छात्राएँ व्यावहारिक सीख, अंतरिक्ष विज्ञान गतिविधियाँ और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ इंटरैक्टिव सत्रों में भाग लेंगी। इस अनुभव से न केवल उनका STEM ज्ञान गहरा होगा, बल्कि उन्हें अंतरिक्ष शिक्षा के वैश्विक मानकों से भी परिचित कराया जाएगा, जिससे भविष्य में भारत की महिला अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की संख्या बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

भविष्य की दिशा

सक्षम् पहल, जो हनीवेल टेक्नोलॉजीज के सहयोग से चल रही है, 2029 तक देश के 12 सरकारी एवं अर्ध‑सरकारी स्कूलों में 12,000 छात्रों तक पहुँचने का लक्ष्य रखती है। दिल्ली के साथ पुणे, बेंगलुरु और गुरुग्राम में भी समान कार्यक्रम लागू किए जा रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर STEM‑प्रेमी युवा लड़कियों को समान अवसर मिलेंगे। इस प्रकार, सरकार का लक्ष्य अंतरिक्ष विज्ञान में लैंगिक संतुलन स्थापित करना और भारतीय युवा को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।