फूटप्रिंट्स प्रीस्कूल ने कर्नाटक राज्य बाल अधिकार आयोग के लाइव CCTV अनिवार्य करने के प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया। कंपनी ने उद्योग‑स्तर के सुरक्षा मानक, पारदर्शी SOPs और माता‑पिता के रीयल‑टाइम अधिकारों को सुनिश्चित करने के तीन प्रमुख वादे किए हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कर्नाटक में लाइव CCTV अनिवार्य करने का प्रस्ताव
- फूटप्रिंट्स ने सुरक्षा मानकों को पारदर्शी करने का वचन दिया
- माता‑पिता को रीयल‑टाइम दृश्य अधिकार का समर्थन
बेंगलुरु, कर्नाटक – भारत की सबसे बड़ी बाल‑देखभाल नेटवर्कों में से एक, फूटप्रिंट्स प्रीस्कूल & डेकेयर ने कर्नाटक राज्य बाल अधिकार आयोग (KSCPCR) के प्रस्ताव को समर्थन दिया, जिसमें सभी डेकेयर सेंटरों में माता‑पिता को लाइव CCTV तक पहुँच अनिवार्य करने की मांग की गई है। यह कदम बेंगलुरु के एक डेकेयर केंद्र में हुई सुरक्षा घटना के बाद आया, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर माता‑पिता के भरोसे को झकझोर दिया था।
पृष्ठभूमि और उद्योग की प्रतिक्रिया
डिजिटल निगरानी की आवश्यकता पहले से ही कई निजी संस्थानों द्वारा अपनाई जा रही है, परंतु इसे अभी तक एक नियामक‑आधारित अनिवार्य मानक नहीं माना गया। फूटप्रिंट्स ने कहा कि सुरक्षा को "बाद में जोड़ने वाला फीचर" नहीं, बल्कि "शुरुआत से निर्मित संरचना" माना जाना चाहिए। संस्थापक एवं सीईओ राज सिंघल ने कहा, "बच्चे का विकास तभी संभव है जब सुरक्षा कभी सवाल न बने।"
फूटप्रिंट्स के तीन प्रमुख वचन
1. खुले SOPs: कंपनी अपने बाल‑सुरक्षा मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) को KSCPCR, अन्य राज्य आयोगों और किसी भी उद्योग‑बॉडी के साथ साझा करेगी, जिससे एकसमान मानक स्थापित हो सके।
2. कॉरपोरेट क्रेच मानक: भारत में कंपनियां अब कैंपस‑आउटसोर्स्ड डेकेयर की जाँच कर रही हैं। फूटप्रिंट्स एक ड्यू‑डिलिजेंस चेक‑लिस्ट तैयार करेगा, जो किसी भी कंपनी को अपने बाल‑देखभाल प्रदाता की सुरक्षा का ऑडिट करने की सुविधा देगा।
3. माता‑पिता का अधिकार: लाइव दृश्य तक पहुँच को प्रीमियम सुविधा नहीं, बल्कि प्रत्येक माता‑पिता का मौलिक अधिकार माना गया है। यह अधिकार सभी डेकेयर संस्थानों में समान रूप से लागू होना चाहिए।
कैसे काम करता है लाइव CCTV
फूटप्रिंट्स के सभी केंद्रों में माता‑पिता को AI‑सहायित लाइव CCTV तक पहुँच प्रदान करने वाला "ParentConnect" ऐप उपलब्ध है। इस ऐप के माध्यम से वे किसी भी समय, चाहे सुबह 11 बजे या दोपहर 2 बजे, अपने बच्चे की गतिविधियों को देख सकते हैं। यह प्रणाली प्रतिक्रिया‑आधारित नहीं, बल्कि रोकथाम‑आधारित है, जिससे संभावित जोखिमों को शुरुआती चरण में ही पहचान कर सुधारा जा सकता है।
भविष्य की दिशा
सिंघल ने कहा, "ऐसी नियामक पहल अच्छे ऑपरेटरों को खतरे में नहीं डालती, बल्कि बुरे ऑपरेटरों से बच्चों को बचाती है। हम इस जांच को स्वागत करते हैं और अधिक पारदर्शिता की आशा रखते हैं।" यदि कर्नाटक इस प्रस्ताव को लागू करता है, तो यह भारत में बाल‑सुरक्षा के मानकों को ऊँचा उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जिससे उद्योग‑व्यापी सुधार और माता‑पिता का भरोसा पुनः स्थापित होगा।