जम्मू‑कश्मीर पुलिस ने दो पुस्तकें जो अलगाववादी और विरोधी‑राष्ट्रवादी विचारों को बढ़ावा देती थीं, को सरकारी स्कूल लाइब्रेरी में उपलब्ध कराकर तीन प्रकाशकों को गिरफ्तार किया। इस कदम के बाद शिक्षा विभाग के कई अधिकारी निलंबित हुए और एक व्यापक जांच शुरू की गई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तीन प्रकाशकों को अलगाववादी‑प्रशंसात्मक पुस्तकों के वितरण के लिए गिरफ्तार किया गया।
  • सरकारी स्कूल लाइब्रेरी में 100‑से‑अधिक प्रतियों को पहले ही वितरित किया जा चुका था।
  • शिक्षा विभाग ने कई अधिकारियों को निलंबित कर जांच का आदेश दिया।

जम्मू‑कश्मीर के पुलिस ने रविवार को तीन प्रकाशकों को गिरफ्तार किया, जिन पर दो पुस्तकें सरकारी स्कूल लाइब्रेरी में वितरित करने का आरोप है, जिनमें अलगाववादी और विरोधी‑राष्ट्रवादी विचारों को प्रशंसा के रूप में प्रस्तुत किया गया था। गिरफ्तार में जम्मू‑आधारित ओबेरॉय बुक सर्विस के इंदरपॉल, और नोएडा‑आधारित डॉमिनेंट पब्लिशर्स के अमरदीप सिंह तथा गिरिश अरोड़ा शामिल हैं।

पुस्तकों की सामग्री और लेखक

विवादित दो शीर्षक हैं – “Personalities and Legends of J&K” (लेखक: हिलाल अहमद और संतोष मीना) और “Great Personalities of Jammu and Kashmir” (लेखक: सुशांत गिरी)। दोनों पुस्तकों में अलगाववादी संगठनों के नेताओं को नायक के रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सामंजस्य पर प्रश्न उठे।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और प्रशासनिक कदम

जुलाई 4 को, राज्य के मुख्य सचिव मनोज सिन्हा ने आठ शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निलंबित किया, एक अनुबंध कर्मचारी को बर्खास्त किया और एक व्यापक जांच का आदेश दिया। यह कदम भाजपा, कांग्रेस और कई स्थानीय दलों की तीव्र आपत्तियों के बाद उठाया गया, जिन्होंने कहा कि ये पुस्तकें “समग्र शिक्षा अभियान” के तहत वितरित की गई हैं, परन्तु सामग्री में अनुचित प्रवृत्तियाँ विद्यमान हैं।

समग्र शिक्षा अभियान में चयन प्रक्रिया

समग्र शिक्षा (Samagra Shiksha) कार्यक्रम के तहत लाइब्रेरी ग्रांट प्राप्त करने वाले स्कूलों को पुस्तक चयन के लिए उप‑समितियों की व्यवस्था की गई थी। कुल 463 शीर्षक शॉर्टलिस्ट किए गए, परन्तु दो पुस्तकें बाद में सामग्री‑समीक्षा में लाल झंडे उठाने के बाद भी 100‑से‑अधिक प्रतियों के साथ स्कूलों तक पहुँच गईं। यह दर्शाता है कि चयन प्रक्रिया में निगरानी की कमी और त्वरित वितरण ने प्रणालीगत दोष उजागर किए।

जांच और भविष्य के प्रभाव

जुलाई 6 को पुलिस ने जम्मू में समग्र शिक्षा कार्यालय और नोएडा में प्रकाशक के कार्यालय की तलाशी ली, ताकि यह पता लगाया जा सके कि लाल झंडे उठाने के बावजूद पुस्तकें लाइब्रेरी में कैसे पहुँचीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले से शिक्षा सामग्री की क्यूरेटिंग में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और राजनीतिक हस्तक्षेप की सीमाओं पर व्यापक चर्चा होगी, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नीति‑निर्माताओं को कड़ी कार्रवाई करनी पड़ेगी।