विद्युत्-विद्युत् छात्रों ने विज़ाखापट्टनम में आयोजित SFI राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक के दौरान शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग की और सार्वजनिक शिक्षा के क्षरण को लेकर प्रचंड विरोध प्रदर्शित किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • SFI की तीन‑दिन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक विज़ाखापट्टनम में शुरू
  • छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की
  • पिछले दशक में 1.20 लाख सरकारी स्कूल बंद, परीक्षा लीकेज और फंड कट की आरोप

विज़ाखापट्टनम, 13 जुलाई 2026 – छात्रों की प्रमुख संगठन स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) ने अपने तीन‑दिन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी मीटिंग की शुरुआत की, साथ ही एक बड़े पैमाने पर रैली भी आयोजित की। इस रैली में छात्र संघ के प्रतिनिधियों ने संघ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग की और सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली के ‘क्षरण’ के विरुद्ध नारे लगाए।

रैली और सार्वजनिक बैठक

रैली का मार्ग वेमना मंदिर से लेकर गुरजादा कला केन्द्र, सिरिपुरम तक था। सांस्कृतिक कलाकारों, ढोलकियों और नर्तकों ने मार्च को जीवंत बना दिया, जबकि छात्रों ने “शिक्षा को बचाओ, मंत्री को हटाओ” जैसे नारे गूँजाए। अंत में गुरजादा कला केन्द्र में सार्वजनिक बैठक आयोजित हुई, जहाँ SFI के विभिन्न नेताओं ने अपने‑अपने बिंदु रखे।

मुख्य आरोप और आँकड़े

SFI के ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी सृजन भट्टाचार्य ने कहा कि बीजेडपी‑नेतृत्व वाले केंद्र ने पिछले दस वर्षों में परीक्षा लीकेज, शिक्षा फंड में ‘लीकेज’ और 1.20 लाख सरकारी स्कूलों को बंद करने जैसी नीतियों को लागू किया। मध्याह्न भोजन योजना, छात्रवृत्ति और फेलोशिप में कटौती का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि एनआरएस की विचारधारा आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के बीजेडपी गठबंधन के बाद लागू हो रही है, जिससे राज्य की शिक्षा प्रणाली को खतरा है।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव

SFI के ऑल इंडिया अध्यक्ष आदर्श एम. साजी ने बताया कि संगठन ने 24 राज्यों में 800 से अधिक प्रदर्शन किए हैं, विशेषकर NEET और CBSE परीक्षा में irregularities के खिलाफ। उन्होंने बताया कि लगभग 22 लाख छात्र NEET में हुई गड़बड़ी से और 16 लाख छात्र CBSE मूल्यांकन त्रुटियों से प्रभावित हुए। इसके अलावा 21 छात्रों की आत्महत्या को “सरकारी हत्याएँ” कहा गया।

भविष्य की राह और संभावित नतीजे

यदि सरकार इन मुद्दों को हल करने में विफल रहती है, तो छात्र आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है, जिससे शैक्षणिक नीतियों में बड़े परिवर्तन की माँग की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा के सार्वजनिक स्वरूप को सुदृढ़ करने के लिए न केवल फंडिंग बल्कि पारदर्शी परीक्षा प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता है। इस प्रकार, SFI की यह बैठक और प्रदर्शन न केवल एक स्थानीय मुद्दा, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पुनः मूल्यांकन का संकेत है।