तमिलनाडु सरकार ने चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 950 अतिरिक्त MBBS सीटें जोड़ने का निर्णय लिया है, जिससे राज्य में कुल सीटों की संख्या बढ़कर 13,999 हो जाएगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • तमिलनाडु में 2026-27 शैक्षणिक वर्ष के लिए 950 नई MBBS सीटें जोड़ी गई हैं।
  • राज्य में अब कुल MBBS सीटों की संख्या 13,999 हो गई है, जो इसे देश में तीसरे स्थान पर रखती है।
  • कुल वृद्धि में 150 सरकारी सीटें और 800 निजी कॉलेज सीटें शामिल हैं।
  • यह कदम निजी कॉलेजों के 'डीम्ड यूनिवर्सिटी' बनने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए उठाया गया है।

तमिलनाडु ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 के लिए 950 अतिरिक्त MBBS सीटें स्वीकृत की हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) द्वारा जारी नवीनतम सीट मैट्रिक्स के अनुसार, इस विस्तार के बाद राज्य के 78 मेडिकल कॉलेजों में कुल सीटों की संख्या बढ़कर 13,999 हो गई है। इस महत्वपूर्ण वृद्धि के साथ, तमिलनाडु अब देश में चिकित्सा सीटों के मामले में तीसरे स्थान पर आ गया है, जहां कर्नाटक (15,395 सीटें) और उत्तर प्रदेश (14,000 सीटें) के बाद इसकी स्थिति है।

सरकारी और निजी संस्थानों में वितरण

NMC के निर्णयानुसार, इन अतिरिक्त सीटों का वितरण राज्य के 13 मेडिकल कॉलेजों में किया गया है। इसमें 3 सरकारी और 10 निजी संस्थान शामिल हैं। विशेष रूप से, नामक्कल, तिरुपुर और तिरुवल्लूर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रत्येक की क्षमता 100 से बढ़ाकर 150 कर दी गई है। इससे सरकारी क्षेत्र में कुल 150 नई सीटें जुड़ी हैं, जबकि शेष 800 सीटें निजी संस्थानों के माध्यम से प्रदान की जाएंगी। इसके अतिरिक्त, एक नया निजी मेडिकल कॉलेज भी स्थापित करने की अनुमति दी गई है जिसमें 150 सीटें होंगी।

स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के.जी. अरुणराज ने इस उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग के निरंतर प्रयासों और बुनियादी ढांचे के विस्तार के कारण ही यह संभव हो पाया है। उन्होंने बताया कि राज्य के 36 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अब कुल 5,200 MBBS सीटें उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि निदेशालय को आगामी राज्य काउंसलिंग प्रक्रिया में इन नई सीटों को सुचारू रूप से शामिल करने के निर्देश दे दिए गए हैं, ताकि प्रवेश प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित रहे।

चुनौतियां और भविष्य की रणनीति

यह सीट वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब तमिलनाडु को कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों के 'डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी' का दर्जा प्राप्त करने के कारण राज्य कोटा से लगभग 461 सीटों का नुकसान होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'डीम्ड यूनिवर्सिटी' बनने से ये संस्थान सरकारी आरक्षण नीतियों और निर्धारित शुल्क संरचना के दायरे से बाहर हो सकते हैं। ऐसे में, सरकार द्वारा की गई यह सीट वृद्धि छात्रों को राहत प्रदान करेगी और राज्य की चिकित्सा शिक्षा व्यवस्था को मजबूती देगी।