ओडिशा के बौध जिले के 26 वर्षीय राकेश प्रधान ने उल्लास (ULLAS) वयस्क शिक्षा कार्यक्रम के माध्यम से अपना जीवन बदल दिया है। वह अब न केवल अपने हस्ताक्षर कर सकते हैं, बल्कि बुनियादी गणना और डिजिटल संदेश भी भेज सकते हैं, जो भारत के नए साक्षरता मिशन की सफलता और चुनौतियों दोनों को दर्शाता है।

मुख्य बातें (Key Takeaways)

  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत 'उल्लास' (ULLAS) कार्यक्रम का लक्ष्य 2030 तक पूर्ण युवा और वयस्क साक्षरता हासिल करना है।
  • साक्षरता की परिभाषा को केवल नाम लिखने से आगे बढ़ाकर डिजिटल, वित्तीय और व्यावहारिक जीवन कौशल तक विस्तृत किया गया है।
  • जमीनी स्तर पर निरंतरता बनाए रखना, आर्थिक तंगी और डिजिटल विभाजन इस कार्यक्रम के लिए बड़ी चुनौतियां हैं।

ओडिशा के बौध जिले के मलीसाही गांव के 26 वर्षीय लॉज मैनेजर राकेश प्रधान छह महीने पहले तक अपना नाम भी नहीं लिख पाते थे। आज वह अंगूठे का निशान लगाने के बजाय दस्तावेजों पर आत्मविश्वास से हस्ताक्षर करते हैं। वह साधारण टेक्स्ट संदेश भेज सकते हैं, मन में बुनियादी गणितीय गणना कर सकते हैं और रोजमर्रा के उन कामों को आसानी से संभाल सकते हैं जिनके लिए कभी उन्हें दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी।

राकेश की यह कहानी भारत के राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रमुख वयस्क शिक्षा कार्यक्रम 'उल्लास' (Understanding Lifelong Learning for All in Society - ULLAS) की सफलता का जीता-जागता उदाहरण है। इस कार्यक्रम को केवल पारंपरिक अक्षरों की पहचान तक सीमित न रखकर एक व्यावहारिक और जीवनोपयोगी कौशल के रूप में डिजाइन किया गया है। राकेश को मलीसाही के ही एक 24 वर्षीय स्वयंसेवक शिक्षक सोमनाथ बारिक ने इस कार्यक्रम से जोड़ा और काम के बाद समय निकालकर उन्हें ओड़िया भाषा और बुनियादी गणित की शिक्षा दी।

वयस्क साक्षरता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में वयस्क साक्षरता का इतिहास दशकों पुराना है, जिसमें 'राष्ट्रीय साक्षरता मिशन' (1988) और 'साक्षर भारत' (2009) जैसी कई योजनाएं शामिल हैं। हालांकि, इन पुराने कार्यक्रमों का मुख्य ध्यान केवल बुनियादी तौर पर पढ़ना, लिखना और हस्ताक्षर करना सिखाने पर था। समय के साथ, तकनीकी प्रगति और डिजिटल अर्थव्यवस्था के उदय के कारण साक्षरता के मायने बदल गए हैं। इसी अंतर को पाटने के लिए 2022 में 'उल्लास' की शुरुआत की गई, जो डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, कानूनी जागरूकता और व्यावसायिक कौशल को भी अपने पाठ्यक्रम में शामिल करता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि भारत में वयस्क साक्षरता को केवल एक उपचारात्मक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि एक मौलिक अधिकार के रूप में देखा जाना चाहिए। डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन सेवाओं के इस युग में, यदि कोई नागरिक स्मार्टफोन का उपयोग करने या बैंक फॉर्म भरने में असमर्थ है, तो वह आधुनिक समाज की मुख्यधारा से बाहर हो जाता है। उल्लास कार्यक्रम इस डिजिटल विभाजन को पाटने का एक महत्वपूर्ण जरिया बन रहा है, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह से स्वयंसेवकों की उपलब्धता और शिक्षार्थियों की आर्थिक स्थिरता पर निर्भर करती है।

विशेषतापारंपरिक साक्षरता कार्यक्रमउल्लास पहल (NEP 2020)
मुख्य ध्यानबुनियादी पढ़ना, लिखना और हस्ताक्षर करना।व्यावहारिक, डिजिटल, वित्तीय और नागरिक साक्षरता।
सीखने का तरीकाकठिन कक्षा-आधारित ऑफलाइन शिक्षण।हाइब्रिड मॉडल (स्वयंसेवक, मोबाइल ऐप और पोर्टल)।
लक्षित दृष्टिकोणबुनियादी संचार के लिए उपचारात्मक शिक्षा।जीवनपर्यंत सीखना और दैनिक जीवन में स्वतंत्र कार्यक्षमता।
"साक्षरता को किसी व्यक्ति को आधुनिक दुनिया में स्वतंत्र रूप से जीने के लिए सशक्त बनाना चाहिए; अन्यथा, यह कागजों पर केवल एक आंकड़ा बनकर रह जाती है।" — राहुल वर्मा, समाजशास्त्र शिक्षक और शोधकर्ता

हालांकि, राकेश जैसे कई वयस्कों के लिए यह यात्रा इतनी आसान नहीं है। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण राकेश को लगातार पढ़ाई के लिए समय नहीं मिल पाता। उनके पास केवल एक स्मार्टफोन है जिसे वे काम पर ले जाते हैं, जिससे 'उल्लास' मोबाइल ऐप का नियमित उपयोग कठिन हो जाता है। स्वयंसेवकों का कहना है कि शिक्षार्थियों के काम के दबाव और घरेलू जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखना इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी चुनौती है।

क्या आप जानते हैं?: उल्लास योजना के तहत, स्वयंसेवक शिक्षकों (मुख्य रूप से छात्रों और समुदाय के सदस्यों) को कोई वित्तीय मुआवजा नहीं मिलता है, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवक-संचालित वयस्क शिक्षा कार्यक्रमों में से एक बनाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: उल्लास (ULLAS) कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य बुनियादी साक्षरता के साथ-साथ डिजिटल, वित्तीय और जीवन-कौशल शिक्षा प्रदान करके 2030 तक 100% युवा और वयस्क साक्षरता हासिल करना है।

प्रश्न 2: उल्लास कार्यक्रम में कौन शामिल हो सकता है?
उत्तर: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु का कोई भी गैर-साक्षर नागरिक स्वयंसेवकों द्वारा संचालित सामुदायिक केंद्रों या उल्लास मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से इसमें नामांकन कर सकता है।