एक संसदीय समिति ने चेतावनी दी है कि NCERT की नई पाठ्यपुस्तकों की कमी और सीबीएसई के नए परीक्षा पैटर्न के बीच बढ़ते अंतर के कारण कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्र भारी तनाव का सामना कर रहे हैं।
मुख्य बातें
- NCERT की नई पाठ्यपुस्तकों के वितरण में देरी से पाठ्यक्रम और अध्ययन सामग्री के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।
- बदले हुए 'एप्लीकेशन-आधारित' परीक्षा पैटर्न के कारण छात्रों में भ्रम और मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
- समिति ने निजी स्कूलों के शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण शुल्क कम करने और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए परीक्षा शुल्क माफी की सिफारिश की है।
नई दिल्ली में प्रस्तुत एक संसदीय समिति की रिपोर्ट के अनुसार, कक्षा 9 से 12 के पाठ्यक्रम के कार्यान्वयन में एक गंभीर अंतराल पाया गया है। हालांकि CBSE ने अपने पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और NCF 2023 के अनुरूप ढाल लिया है, लेकिन NCERT द्वारा नई पाठ्यपुस्तकों को समय पर उपलब्ध न करा पाने के कारण छात्र पुराने संसाधनों के भरोसे नए और कठिन विषयों को पढ़ने के लिए मजबूर हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शिक्षा नीति में सुधार की गति तो तेज है, लेकिन जमीनी स्तर पर संसाधनों की उपलब्धता उस गति का साथ नहीं दे पा रही है। यदि पाठ्यपुस्तकों और परीक्षा के पैटर्न के बीच यह तालमेल नहीं बैठा, तो बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों का प्रदर्शन गिर सकता है और शैक्षणिक गुणवत्ता पर सवाल उठ सकते हैं।
पाठ्यपुस्तकों की अनुपलब्धता और बदलती परीक्षा प्रणाली के बीच का यह अंतर सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य और उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है।
समिति ने यह भी नोट किया कि शिक्षकों के प्रशिक्षण में एक बड़ी गिरावट देखी गई है। जहाँ पिछले पांच वर्षों में 1.1 करोड़ से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया, वहीं 2025 तक ऑनलाइन प्रशिक्षण में भारी कमी आई है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों के निजी स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण के लिए भारी शुल्क देना पड़ता है, जो एक चिंता का विषय है।
तुलनात्मक विश्लेषण: नामांकन रुझान
| परीक्षा स्तर | 2024 में पंजीकरण | 2025 में पंजीकरण |
|---|---|---|
| कक्षा 10 | 22,51,812 | 23,85,079 |
| कक्षा 12 | 16,33,730 | 17,04,367 |
समिति ने आगे सिफारिश की है कि CBSE को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए परीक्षा शुल्क में छूट देनी चाहिए और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में अधिक पारदर्शिता लानी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: संसदीय पैनल ने मुख्य समस्या क्या बताई है?
उत्तर: पैनल ने बताया है कि नई पाठ्यपुस्तकों की कमी और नए परीक्षा पैटर्न के कारण छात्रों में शैक्षणिक तनाव बढ़ रहा है।
प्रश्न 2: शिक्षकों के प्रशिक्षण के बारे में क्या सिफारिश की गई है?
उत्तर: समिति ने शिक्षकों के प्रशिक्षण शुल्क की समीक्षा करने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में निरंतरता बनाए रखने की सिफारिश की है।