सुप्रीम कोर्ट ने CBSE के नए 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम से प्रभावित छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता जताई है। कोर्ट ने केंद्र और बोर्ड से छात्रों के हितों की रक्षा करने और मूल्यांकन प्रणाली में सुधार के लिए निर्देश मांगे हैं।

मुख्य बातें

  • सुप्रीम कोर्ट 21 अगस्त को CBSE के डिजिटल मूल्यांकन (OSM) मामले पर अगली सुनवाई करेगा।
  • छात्रों का आरोप है कि OSM प्रणाली के कारण उनके अंक कम आए हैं, जिससे प्रवेश परीक्षाओं में समस्या हो रही है।
  • कोर्ट ने CBSE से पूछा है कि प्रभावित छात्रों के हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
  • सरकार ने मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा के लिए एस. राधा चौहान के नेतृत्व में एक आयोग बनाया है।

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) प्रणाली को लेकर मचे घमासान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि वह 21 अगस्त को इस मामले पर दोबारा सुनवाई करेगी।

यह मामला उन हजारों छात्रों से जुड़ा है जो डिजिटल ग्रेडिंग प्रणाली के कारण शैक्षणिक संकट में फंस गए हैं। OSM प्रणाली के तहत, शिक्षक भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं के बजाय कंप्यूटर पर स्कैन की गई प्रतियों का मूल्यांकन करते हैं। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि कई छात्र बोर्ड परीक्षा पास करने के बाद अन्य पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश परीक्षा दे चुके हैं, लेकिन CBSE के कम अंकों के कारण वे न्यूनतम योग्यता प्राप्त करने में विफल रहे हैं।

यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल अंकों का नहीं, बल्कि छात्रों के करियर की दिशा का है। यदि डिजिटल मूल्यांकन में त्रुटियां बनी रहती हैं, तो यह देश के लाखों छात्रों के उच्च शिक्षा के अवसरों को प्रभावित कर सकता है।

डिजिटल मूल्यांकन में पारदर्शिता और सटीकता का अभाव छात्रों के भविष्य के साथ एक गंभीर खिलवाड़ हो सकता है।

अदालत ने इस दौरान CBSE के माध्यम से पूछा, "यह पता लगाएं कि आप छात्रों के हितों की रक्षा कैसे कर सकते हैं?" गौरतलब है कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की अनुपलब्धता के कारण मामले को स्थगित कर दिया गया। इससे पहले, सरकार ने बताया था कि मूल्यांकन प्रणाली की समीक्षा के लिए एस. राधा चौहान के नेतृत्व में एक आयोग गठित किया गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पारंपरिक रूप से, बोर्ड परीक्षाएं भौतिक उत्तर पुस्तिकाओं के मैन्युअल मूल्यांकन पर आधारित थीं। हालांकि, दक्षता और गति बढ़ाने के लिए CBSE ने डिजिटल 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' की ओर रुख किया, लेकिन तकनीकी खामियों और मानवीय त्रुटियों के डर ने इस नई प्रणाली को विवादों के घेरे में ला दिया है।

क्या आप जानते हैं?: OSM प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को तेज करना है, लेकिन यह तकनीक मानवीय स्पर्श और सूक्ष्मता को प्रभावित कर सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. OSM प्रणाली क्या है?
यह एक डिजिटल पद्धति है जहां शिक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करते हैं।

2. सुप्रीम कोर्ट ने क्या मांग की है?
कोर्ट ने केंद्र और CBSE से इस प्रणाली के लिए नियम बनाने और छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा करने को कहा है।