मल्यालम स्टार प्रित्वीराज के 11‑साल की बेटी अलंकृता ने अपनी पहली फिल्मी गानी ‘सर्कस’ को आवाज़ दी। फिल्म ‘I, Nobody’ के निर्माताओं ने इस युवा प्रतिभा को मंच दिया, जिससे दर्शकों और परिवार दोनों में उत्साह भर गया।

मल्यालम अभिनेता‑निर्माता प्रित्वीराज सुकुमरन की 11‑साल की बेटी, अलंकृता मेनन, ने हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म I, Nobody में ‘सर्कस’ गीत को गाकर एक नई पहचान बनाई। यह गीत, संगीतकार जैक्स बेजोय द्वारा रचित और गीतकार ज़ीबा टॉमी द्वारा लिखित, फिल्म के मुख्य थीम को दर्शाता है और कहानी के अंदर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर बजता है।

परिवार का अभिमान और सामाजिक प्रभाव

प्रित्वीराज ने अपनी ट्विटर (X) पोस्ट में कहा, “धन्यवाद सभी दर्शकों को, आपके प्यार और प्रतिक्रिया के लिए। ‘सर्कस’ हमारे लिए खास है क्योंकि इसे हमारी छोटी अलंकृता ने गाया है, जो अभी 11 साल की है।” इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर सराहना और भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न की, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि युवा प्रतिभा को मंच पर लाना न केवल कला में नयी ऊर्जा लाता है, बल्कि दर्शकों के बीच एक सामुदायिक जुड़ाव भी बनाता है।

निर्देशक और संगीत शिक्षक का योगदान

फिल्म के निर्देशक निसाम बशीर ने अलंकृता को इस गीत के लिए चुनने का श्रेय अपने ही हाथों को दिया। उन्होंने कहा कि वह “विचार करती थीं कि यह गीत फिल्म में एक जीवंत, अनभिज्ञ आवाज़ के लिए उपयुक्त होगा।” इसके अतिरिक्त, अलंकृता के संगीत शिक्षकों—सिमी आंटी, डोमिनिक सर, लवली मैडम और पुष्कर सर—का उल्लेख प्रित्वीराज ने किया, जिन्होंने कई वर्षों में उसकी संगीत क्षमताओं को निखारा।

फिल्म ‘I, Nobody’ का समग्र परिप्रेक्ष्य

‘I, Nobody’ में प्रित्वीराज के साथ परवती, अशोकन और कई अन्य कलाकारों ने भाग लिया है। फिल्म को मिश्रित समीक्षाएँ मिली हैं; कुछ समीक्षक ने कहानी की गहराई और थ्रिलर तत्वों की प्रशंसा की, जबकि अन्य ने लंबी रन‑टाइम और धीमी गति को कमज़ोरी बताया। फिर भी, अलंकृता का गाना फिल्म के प्री‑रिलीज़ प्रचार में एक प्रमुख आकर्षण बन गया, जिससे फिल्म के बॉक्स‑ऑफ़िस संभावनाओं में सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

भविष्य की संभावनाएँ

अलंकृता की इस उपलब्धि को देखते हुए, कई उद्योग विशेषज्ञ यह अनुमान लगा रहे हैं कि बच्ची गायक और कलाकारों को अधिक अवसर मिलने चाहिए। यह कदम न केवल युवा प्रतिभा को प्रोत्साहित करता है, बल्कि भारतीय सिनेमा में विविधता और नवाचार का द्वार भी खोलता है।