दिलजीत डोसांझ की विवादास्पद फिल्म 'सतलुज' को भारत में प्रतिबंध के बाद ZEE5 की अंतरराष्ट्रीय लाइब्रेरी से भी हटाया गया है। इस कदम ने फिल्म की निरंतर सेंसरशिप और रिलीज़ समस्या को और गहरा कर दिया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ‘सतलुज’ को भारत में प्रतिबंध के बाद ZEE5 अंतरराष्ट्रीय से हटाया गया।
- फिल्म को अभी तक CBFC की मंजूरी नहीं मिली, 127 कट्स की मांग की गई थी।
- जसवंत सिंह खलरा की कहानी पर आधारित फिल्म ने राजनीतिक एवं सामाजिक बहस को उजागर किया।
नई दिल्ली – भारतीय अभिनेता और गायक दिलजीत डोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को ZEE5 की अंतरराष्ट्रीय स्ट्रीमिंग लाइब्रेरी से हटा दिया गया है, यह समाचार कई मीडिया पोर्टलों ने बताया। यह हटाव भारत में फिल्म पर लगाए गए प्रतिबंध के बाद आया, जिससे फिल्म के निर्माणकर्ताओं और दर्शकों दोनों में गहरी निराशा पाई जा रही है।
पृष्ठभूमि और सेंसरशिप की कहानी
‘सतलुज’, जिसका मूल शीर्षक ‘Punjab ’95’ था, 2022 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (CBFC) को प्रस्तुत किया गया था, लेकिन बोर्ड ने फिल्म पर 127 कट्स की मांग की और कोई प्रमाणपत्र नहीं दिया। फिल्म का मुख्य विषय पंजाब के मिलिटेंट वर्षों में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खलरा की संघर्ष कहानी है, जिसमें फर्जी फाँसी और अनधिकृत दफ़नाओं के आरोपों को उजागर किया गया है। इस संवेदनशील विषय ने कई बार सरकारी दबाव और विरोध को जन्म दिया।
OTT प्लेटफ़ॉर्म पर संघर्ष
‘सतलुज’ को 3 जुलाई को बिना किसी प्रचार के ZEE5 पर रिलीज़ किया गया, लेकिन रिलीज़ के कुछ ही दिनों में इसे प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया गया। हटाने के बाद IMDb पर भी फिल्म की यूज़र रेटिंग हटाई गई, जिससे इस विवाद की गंभीरता और बढ़ गई। फिल्म को 2023 में टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में स्क्रीनिंग के लिए भी चुना गया था, लेकिन भारतीय अधिकारियों की आपत्ति के कारण यह योजना रद्द कर दी गई।
डिलजीत का इंस्टाग्राम लाइव और भविष्य की आशा
हटाव के बाद, दिलजीत ने इंस्टाग्राम लाइव के माध्यम से अपने प्रशंसकों से बात की और कहा कि उन्होंने पहले से ही इस हटाव की संभावना देखी थी। उन्होंने अपने दर्शकों से अपील की कि वे अभी तक फिल्म नहीं देखी है, तो इसे अपने मित्रों और परिवार को दिखाएँ। दिलजीत ने यह भी जोड़ा कि वह पंजाब के लिए अपना जीवन समर्पित करेंगे, “मैं पंजाब के साथ हूँ जब तक मैं जीवित हूँ।”
संभावित प्रभाव और आगे क्या?
‘सतलुज’ का हटाव न केवल एक फिल्म की उपलब्धता को प्रभावित करता है, बल्कि भारतीय सिनेमा में सेंसरशिप के मुद्दे को भी पुनः उजागर करता है। यदि भविष्य में सरकार की नीतियों में बदलाव नहीं आता, तो ऐसे कई प्रोजेक्ट्स को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सीमित किया जा सकता है। इस बीच, फिल्म निर्माताओं ने ZEE5 के बयान में कहा कि “वर्तमान विकास के प्रकाश में” फिल्म को अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कारण नहीं बताया।