केंद्रीय समिति ने दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ पर प्रतिबंध जारी रखने की सिफ़ारिश की, क्योंकि फिल्म में राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर चिंताएँ उठाई गई हैं। भारत और विदेश दोनों में ज़ी5 ने फिल्म को हटाया, जिससे इसका भविष्य अनिश्चित रह गया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- केंद्रीय समिति ने फिल्म पर प्रतिबंध जारी रखने की सिफ़ारिश की।
- ‘सतलुज’ को भारत और विदेश दोनों में ज़ी5 के प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया गया।
- पंजाब के राजनीतिक दल और धार्मिक संगठनों ने इस निर्णय पर अलग‑अलग राय व्यक्त की।
दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को फिर से बड़े झटके का सामना करना पड़ रहा है। नई दिल्ली में नियुक्त एक अंतर‑विभागीय समिति ने रिपोर्ट में कहा है कि फिल्म की सामग्री भारत की संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय सुरक्षा को चुनौती देती है, इसलिए प्रतिबंध जारी रखना उचित है। यह सिफ़ारिश तब सामने आई जब फिल्म को भारत में केवल दो दिन के बाद ज़ी5 से हटाया गया था।
फिल्म की पृष्ठभूमि और विवाद
हनी त्रेहन द्वारा निर्देशित ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खलरा के जीवन पर आधारित है, जो 1984‑1994 के दौरान पंजाब में अनगिनत अनपहचाने शवों की अवैध दाह संस्कार की जांच में जुटे थे। फिल्म में उनके 1995 में अपहरण और हत्या के घटनाक्रम को दिखाया गया है। आलोचकों का तर्क है कि फिल्म में मिलिटेंटों की भूमिका को कम करके सुरक्षा बलों की अतिरेक को अधिक उजागर किया गया, जिससे एक असंतुलित दृष्टिकोण बनता है।
सरकारी कार्रवाई और कानूनी आधार
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म की विस्तृत समीक्षा के बाद सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा। यह धारा सरकार को संप्रभुता, रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और विदेशी संबंधों जैसे कारणों से ऑनलाइन सामग्री को ब्लॉक करने का अधिकार देती है। समिति में सूचना एवं प्रसारण, गृह, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, विदेश, महिला एवं बाल विकास, तथा न्याय मंत्रालय के अधिकारी शामिल थे।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और सामाजिक प्रभाव
पंजाब में इस कदम पर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अलग‑अलग राय व्यक्त की। शिरोमणि गुरुद्वारा परिषद (SGPC) ने प्रतिबंध को उलटने की मांग की, जबकि शिरोमणि अकाली दल ने फिल्म के प्रदर्शन को समर्थन देने की घोषणा की। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर तीव्र बहस चल रही है, जहाँ कई उपयोगकर्ता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और इतिहास के संवेदनशील पहलुओं को उजागर करने के अधिकार की वकालत कर रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध और भविष्य की अनिश्चितता
भारत में हटाए जाने के बाद, ‘सतलुज’ को अब ज़ी5 के अंतरराष्ट्रीय कैटलॉग से भी हटा दिया गया है, जिससे विदेश में रहने वाले दर्शकों के लिए भी फिल्म अनुपलब्ध हो गई। निर्देशक हनी त्रेहन ने इस बात की पुष्टि की है, लेकिन इस कदम के पीछे के कारणों पर विस्तार से टिप्पणी नहीं की। वर्तमान में फिल्म की पुनः उपलब्धता के बारे में कोई स्पष्ट समय‑सीमा नहीं दी गई है, और यह देखना बाकी है कि भविष्य में कोई कानूनी या राजनैतिक पुनरावलोकन होगा या नहीं।