दिग्गज प्लेबैक गायिका एस. जानकी का 84 वर्ष की आयु में मायसूर में निधन हो गया। उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में चार दशकों तक अपने अनूठे स्वर से सभी भावनाओं को व्यक्त किया और 18 भाषाओं में गीत गाए।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • एस. जानकी का 84 वर्ष की आयु में मायसूर में निधन
  • राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित कई सम्मान और 18 भाषाओं में रिकॉर्डिंग
  • इलायाराजा, इरावनाचलम जैसे संगीत दिग्गजों के साथ अभूतपूर्व सहयोग

दक्षिण भारतीय सिनेमा की सर्वकालिक सबसे प्रभावशाली आवाज़, एस. जानकी, 11 जुलाई 2026 को मायसूर में अपने परिवार के साथ अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर ने न केवल संगीत प्रेमियों को बल्कि पूरे फिल्म उद्योग को गहरा शोक में डाल दिया है।

संगीत यात्रा की शुरुआत और शुरुआती सफलता

जनकी ने 1960 के दशक में कार्नाटिक संगीत की कठोर प्रशिक्षण के बाद फिल्म जगत में कदम रखा। तमिल सिनेमा में प. सुषेले के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने के.वी. महादेवन और एम.एस. विश्वनाथन जैसे संगीत दिग्गजों के साथ काम किया। 1976 में इरायाराजा के निर्देशन में “अन्नाकिली” के गाने ने उन्हें त्वरित पहचान दिलाई, और यह फ़िल्म आज भी तमिल संगीत इतिहास में मील का पत्थर माना जाता है।

राष्ट्रीय सम्मान और बहुभाषी योगदान

जनकी ने 16 वैयथिनिले (1977) के “सेंथूरा पूवे” गीत के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार – सर्वश्रेष्ठ महिला प्लेबैक गायिका प्राप्त किया। इसके अलावा उन्होंने कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओड़िया, गुजराती, हिंदी सहित 18 भाषाओं में लगभग 12,000 गाने रिकॉर्ड किए, जिससे उनका स्वर भारत के हर कोने में गूंजता रहा।

इलाायाराजा के साथ सहयोग और संगीत नवाचार

इलाायाराजा ने बार-बार कहा कि जानकी उनकी सबसे अभिव्यक्तिपूर्ण गायिका हैं। उनके साथ मिलकर “अन्नाकिली”, “साकलाकला वाल्लवन्”, “मोगामुल” आदि कई क्लासिक गाने बने, जो आज भी संगीत प्रेमियों के प्लेलिस्ट में शीर्ष स्थान पर हैं। उनके राग अभेरी, दरबारी कणडा और शन्मुखप्रिया में गाए गये गाने कार्नाटिक संगीत और फिल्म संगीत के मेल का उत्तम उदाहरण हैं।

विरासत और सांस्कृतिक प्रभाव

जनकी को अक्सर “जनकियम्मा” कहा जाता रहा, और उनकी आवाज़ ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। उन्होंने केवल फिक्शनल फिल्म संगीत ही नहीं, बल्कि थ्यागराज के kritis पर आधारित एक एल्बम भी जारी किया, जिससे उनका शास्त्रीय संगीत में योगदान स्पष्ट होता है। उनका निधन भारतीय संगीत इतिहास में एक युग समाप्ति के रूप में देखा जाएगा, पर उनका स्वर और गीत भविष्य की पीढ़ियों को सदा प्रेरित करेंगे।