सैमंथा रुथ प्रभु ने इंस्टाग्राम पर अपने फिल्म 'माँ इंटी बंगारम' की 100 करोड़ की कमाई के साथ एक गुप्त ब‑सेंटर प्रदर्शक की टिप्पणी को भी साझा किया। उन्होंने महिला‑मुख्य फिल्मों के प्रति उद्योग की शंकाओं को उजागर कर, भविष्य में समान अवसरों की आशा जताई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ब‑सेंटर प्रदर्शक ने महिला‑मुख्य फिल्म को ‘जोखिम’ कहा
  • ‘माँ इंटी बंगारम’ ने 100 करोड़ की सीमा पार की
  • सैमंथा ने इस सफलता को जोखिम‑लेने की प्रेरणा बताया

हैदराबाद – सैमंथा रुथ प्रभु ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में बतलाया कि कैसे एक ब‑सेंटर प्रदर्शक ने फिल्म माँ इंटी बंगारम के रिलीज़ से पहले ही इसे “हिरोइन‑फ़िल्म” कहकर नकार दिया था। यह टिप्पणी, जो उन्होंने अनजाने में सुनी, आज के समय में महिला‑मुख्य फ़िल्मों की धारणात्मक बाधाओं को उजागर करती है।

प्रदर्शक की टिप्पणी और उसका प्रभाव

सैमंथा ने बताया कि एक मित्र ने ब‑सेंटर के एक मालिक से फिल्म के संभावित बॉक्स‑ऑफ़ पर राय पूछी। प्रदर्शक ने तुरंत कहा, “कोई भी हिरोइन वाली फ़िल्म क्यों देखेगा? अगर बड़ी हीरो के साथ हो तो ठीक है, लेकिन सिर्फ़ हिरोइन के साथ? कोई नहीं आएगा।” इस टिप्पणी ने सैमंथा को यह महसूस कराया कि उद्योग में महिला‑मुख्य प्रोजेक्ट को अभी भी “व्यावसायिक जोखिम” माना जाता है।

‘माँ इंटी बंगारम’ की बड़ा सफलता

फिल्म, जो 19 जून को रिलीज़ हुई, तीन हफ़्तों से अधिक समय तक थियेटरों में चल रही है और वैश्विक बॉक्स‑ऑफ़ पर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है। यह आंकड़ा केवल वित्तीय मील‑स्टोन नहीं, बल्कि एक प्रतीक है—पहली तेलुगु फिल्म जहाँ महिला लीडर ने अकेले 100 करोड़ कमाए। इस उपलब्धि ने अन्नुश्का शेट्टी की ‘अरुंधति’ को भी मात दी, जिससे यह अब तक की सबसे अधिक कमाने वाली महिला‑मुख्य तेलुगु फिल्म बन गई।

सैमंथा का संदेश और भविष्य की आशा

सैमंथा ने कहा, “वास्तविक परिवर्तन तभी आता है जब कोई जोखिम लेता है। अक्सर वह जोखिम फेल हो जाता है, पर कभी‑कभी सफलता मिलती है—हमारी फिल्म ने वह सफलता हासिल की।” उन्होंने आगे कहा कि अगली बार जब कोई ब‑या सी‑सेंटर में महिला‑मुख्य फ़िल्म के बारे में पूछे, तो जवाब “ना” नहीं बल्कि “देखते हैं” होना चाहिए। यह आशावादी दृष्टिकोण उद्योग में अधिक विविधता लाने की दिशा में एक कदम है।

पर्दे के पीछे की कहानी

निर्देशक बी. वी. नंदिनी रेड्डी और निर्माताओं राज निडिमोरु, हिमंक रेड्डी दुर्वुरु ने मिलकर इस प्रोजेक्ट को तैयार किया। ग़ुलशन देवैया, डिगंथ, गौतमि, और श्रीमुखी ने महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं, जबकि संगीतकार संतोश नारायणन ने ध्वनि‑परिदृश्य को समृद्ध किया। सैमंथा ने स्वयं प्रोडक्शन कंपनी ट्रालाला मूविंग पिक्चर्स के साथ इस फिल्म को वित्तीय एवं रचनात्मक समर्थन दिया।