वायनाड प्रकृति संरक्षण समिति और कई पर्यावरण एवं मानवाधिकार संगठनों ने अनक्कम्पॉयिल‑कल्लाड़ी‑मेप्पाड़ी टनल को रद्द करने की मांग की। उन्होंने ठेकेदार कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही, भविष्य के प्रोजेक्टों से ब्लैकलिस्टिंग और आपराधिक मुकदमे की भी माँग की।
केरल के वायनाड जिले में अनक्कम्पॉयिल‑कल्लाड़ी‑मेप्पाड़ी टनल परियोजना को लेकर स्थानीय पर्यावरण समूहों ने कल (9 जुलाई 2026) कलपट्टा सिविल स्टेशन के सामने धरना दिया। वायनाड प्रकृति संरक्षण समिति (WPSS) के अध्यक्ष एन. बदुशा ने इस आंदोलन का उद्घाटन किया, जबकि पश्चिमी घाट संरक्षण समिति के अध्यक्ष वरघीस वाट्टेक्कटिल ने भी समर्थन जताया। इस टनल का उद्देश्य कोझिकोड‑वायनाड कनेक्टिविटी को सुधारना था, परंतु पर्यावरणीय जोखिमों को देखते हुए समूहों ने इसे ‘केरल की जीवनरेखा’ कहे जाने वाले प्रोजेक्ट को रद्द करने की माँग की।
परियोजना की रूपरेखा
राज्य सरकार ने इस टनल को मंजूरी देने के लिये पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA) प्राधिकरण से 20 कड़े शर्तें ली थीं, जबकि मो.इ.एफ़सी.सी. ने कुल 60 शर्तें निर्धारित की थीं। इन शर्तों में नाज़ुक पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा, रॉक ब्लास्टिंग पर प्रतिबंध और स्थानीय जलस्रोतों की रक्षा शामिल थी। फिर भी, प्रोजेक्ट के अनुबंधकर्ता ने इन शर्तों का उल्लंघन किया, ऐसा आरोप समूहों ने लगाया है।
धारणा की मांगें
धरने वाले समूहों ने ठेकेदार कंपनी के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई, भविष्य के सरकारी अनुबंधों से ब्लैकलिस्टिंग और आपराधिक मुकदमा चलाने की माँग की। वे यह भी कह रहे हैं कि पिछले राज्य सरकार ने पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त करने के लिये मो.इ.एफ़सी.सी. को झूठी जानकारी दी थी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं को अनदेखा करने का आरोप लगाया, यह दावा करते हुए कि सरकार ने परियोजना को ‘केरल की जीवनरेखा’ के रूप में प्रस्तुत करके दबाव बनाया।
पर्यावरणीय उल्लंघन के आरोप
समूहों ने कहा कि टनल निर्माण क्षेत्र हाल के वर्षों में तीन बड़े भूस्खलन से ग्रस्त रहा है, और इस क्षेत्र में रॉक ब्लास्टिंग पर सख्त प्रतिबंध था। फिर भी, पूर्व मुख्यमंत्री ने आधिकारिक उद्घाटन समारोह में एक प्रारंभिक विस्फोट करवाया, जिससे पर्यावरणीय नियमों का स्पष्ट उल्लंघन हुआ। उन्होंने यह भी बताया कि टनल का प्रस्तावित मार्ग पश्चिमी घाट की जैव विविधता को खतरे में डालता है और मौजूदा घाटी सड़कों की भीड़भाड़ का स्थायी समाधान नहीं है।
आगे का रास्ता और संभावित प्रभाव
नवीनतम भूस्खलन को समूहों ने प्रकृति की चेतावनी बताया है, और आगे के खुदाई कार्यों को रोकने की पुकार की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टनल को जारी रखा गया तो न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान होगा, बल्कि जलस्रोतों की गिरावट, वन्यजीवों के आवास का विनाश और सामाजिक विस्थापन की संभावना भी बढ़ेगी। सरकार को अब पर्यावरणीय स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए वैकल्पिक ट्रांसपोर्ट समाधान तलाशने की आवश्यकता है।