नीलगिरी के गुदालूर फ़ॉरेस्ट डिवीजन में जाल में फँसे लेपर्ड को वन विभाग ने बचा कर मुडुमलई टाइगर रिज़र्व में छोड़ दिया। जाल लगाने वाले को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू की गई।

नीलगिरी के गुदालूर वन विभाग के तहत पत्तावयाल में स्थित कृषि भूमि पर एक लेपर्ड जाल में फँस गया था। स्थानीय किसान एन.सी. कृष्णन ने रात 8 बजे इस घटना की सूचना विभाग को दी, जिससे बचाव दल तुरंत कार्रवाई में जुट गया।

बचाव का विस्तृत चरण

वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचते ही जाल की पहचान कर लेपर्ड को सुरक्षित करने के लिए विशेष जाल हटाने के उपकरण इस्तेमाल किए। मुडुमलई टाइगर रिज़र्व (MTR) के वैटेरिनरी असिस्टेंट सर्जन के. राजेश कुमार ने घायल जानवर को प्राथमिक उपचार दिया और उसे एक विशेष डिज़ाइन किए गए पिंजरे में स्थानांतरित किया।

रिज़र्व में पुनःरिहाई

सभी चिकित्सीय जाँच के बाद, लेपर्ड को स्वस्थ माना गया और उसे सुबह ही टाइगर रिज़र्व के घने जंगल में छोड़ा गया। यह कदम न केवल जंगली जीव की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, बल्कि इस प्रकार के जालों के खिलाफ चेतावनी भी देता है।

जाल लगाने वाले की गिरफ्तारी

जैसे ही लेपर्ड को मुक्त किया गया, वन विभाग ने जाल लगाने वाले की पहचान के लिए तेज़ी से जांच शुरू की। 40 वर्षीय दैनिक मज़दूर के. बालन को गिरफ्तार किया गया, जिसने छोटे जंगली शिकार के लिए जाल बिछाया था, जैसा कि उसने स्वीकार किया। इस घटना ने वन में अवैध जाल बिछाने के खतरे को उजागर किया, जो न केवल बड़े मवेशियों बल्कि बायोविविधता को भी नुकसान पहुंचाता है।

संबंधित घटना: सिगुर में बाघ की मौत

इसी दिन, मुडुमलई टाइगर रिज़र्व के बफ़र ज़ोन में स्थित सिगुर फ़ॉरेस्ट रेंज में एक बाघ की मृत शरीर मिला। फील्ड स्टाफ ने नियमित पैट्रोल के दौरान इस शव को पाया, और पोस्टमार्टेम के बाद इसे नष्ट कर दिया गया। प्रारंभिक जांच में प्राकृतिक कारणों को संभावित कारण बताया गया, परंतु इस घटना ने वन्यजीव संरक्षण में सतत निगरानी की आवश्यकता को दोहराया।

भविष्य की दिशा

वन विभाग ने कहा कि इस तरह के जालों की रोकथाम हेतु स्थानीय समुदाय को जागरूक किया जाएगा और कड़े दंडात्मक प्रावधान लागू किए जाएंगे। साथ ही, मुडुमलई टाइगर रिज़र्व में बायोविविधता को संरक्षित रखने के लिए निरंतर निगरानी, डाटा‑आधारित प्रबंधन और अंतर‑विभागीय सहयोग को सुदृढ़ किया जाएगा।