E20 ईंधन के व्यापक उपयोग के बाद पुरानी कारों में ईंधन दक्षता घटने की शिकायतें बढ़ी हैं। सरकार ने सर्वेक्षण के जवाब में वैज्ञानिक परीक्षण, आर्थिक लाभ और पर्यावरणीय प्रभावों को स्पष्ट किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- E20 पेट्रोल को वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित माना गया है।
- कुछ वाहनों में 3‑5% तक माइलेज में हल्का गिरावट संभव है, लेकिन बड़ी क्षति नहीं।
- सरकार ने व्यापक परीक्षण के बाद इस ईंधन को मंजूरी दी है; व्यापक इंजन नुकसान के प्रमाण नहीं मिले हैं।
भारत ने अप्रैल 2025 में 20 % एथनॉल‑ब्लेंडेड पेट्रोल (E20) का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया, जिससे आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और किसानों की आय में इज़ाफ़ा करने की नीति को गति मिली। हालांकि, 2026 में एक स्थानीय सर्वेक्षण ने बताया कि 2023 से पहले निर्मित 66 % पेट्रोल कारों के मालिकों को ईंधन दक्षता में 10 % से अधिक गिरावट महसूस हुई। यह आंकड़ा मई 2026 के समान सर्वेक्षण से काफी अधिक है, जहाँ 45 % ने समान समस्या बताई थी।
पृष्ठभूमि और नीति विकास
एथनॉल ब्लेंडिंग का भारत में इतिहास दो दशकों से अधिक पुराना है। 2001 में पायलट प्रोजेक्ट, 2004 में आधिकारिक घोषणा, 2006 में कई राज्यों में E5 का परिचय और 2013 में नीति ढांचा स्थापित किया गया। 2018 की राष्ट्रीय बायोफ़्यूल नीति ने एथनॉल की फ़ीडस्टॉक को विस्तारित किया और निजी निवेश को प्रोत्साहित किया, जिससे E20 की ओर संक्रमण सहज बना। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया में ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल कंपनियों और तकनीकी विशेषज्ञों के साथ कई वर्ष की परामर्शी बातचीत हुई।
तकनीकी परीक्षण और सुरक्षा आश्वासन
सरकार ने स्पष्ट किया कि E20 को लागू करने से पहले ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया (ARAI), सियाम और प्रमुख तेल कंपनियों द्वारा विस्तृत परीक्षण किया गया। इन परीक्षणों में विभिन्न आयु वर्ग की कारों को शामिल किया गया और कोई व्यापक इंजन क्षरण या अनियमित ध्वनि नहीं पाई गई। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, लाखों पुरानी कारें बिना किसी एथनॉल‑संबंधित समस्या के सर्विसिंग कर रही हैं।
आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव
E20 का उद्देश्य पेट्रोल की कीमत घटाना नहीं, बल्कि कच्चे तेल आयात को घटाकर विदेशी मुद्रा बचत, कार्बन उत्सर्जन में कमी और किसानों को बेहतर मूल्य प्रदान करना है। वर्तमान में कच्चे तेल की कीमतों के कारण E20 की उत्पादन लागत कभी‑कभी शुद्ध पेट्रोल से अधिक हो सकती है, परंतु दीर्घकालिक लाभ—जैसे कि ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ वायु—अधिक महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
उपभोक्ताओं के लिए सरकार का संदेश
सरकार ने उपभोक्ताओं से सामाजिक मीडिया पर फैले अप्रमाणित दावों पर भरोसा न करने की सलाह दी है। बीआईएस मानकों के तहत ईंधन की गुणवत्ता की निगरानी की जाती है और सभी पेट्रोल पंपों पर समान रूप से उपलब्ध कराई जाती है। कुल मिलाकर, E20 को वैज्ञानिक रूप से मान्य, सुरक्षित और पर्यावरण‑मित्र ईंधन माना गया है।