राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (NGT) ने सेगुर पठारी हाथी कॉरिडोर में मौजूदा सील किए गए रिसॉर्ट भवनों को बंद रखने और नई निर्माण कार्य को प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया। अदालत में चल रहे कानूनी विवाद को देखते हुए, ट्रिब्यूनल ने वन्यजीवों की आवाज़ सुनने के लिए कड़ा निगरानी आदेशित किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सेगुर हाथी कॉरिडोर में सभी सील किए गए रिसॉर्ट भवन बंद रहेंगे।
  • नया निर्माण या वाणिज्यिक गतिविधि को प्रतिबंधित किया गया।
  • कोर्ट के चल रहे विवाद को प्रभावित किए बिना कड़ी निगरानी अनिवार्य की गई।

दक्षिणी बेंच के राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (NGT) ने 10 जुलाई, 2026 को एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया, जिसमें सेगुर पठारी हाथी कॉरिडोर के भीतर सील किए गए रिसॉर्ट भवनों को बंद रखने और नई निर्माण कार्य को रोकने का निर्देश दिया गया। यह निर्णय नीलगिरी बायोस्फीयर रिज़र्व के प्रमुख वन्यजीव गलियारों में से एक की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कई कदमों में एक और मील का पत्थर है।

पृष्ठभूमि और कानूनी परिप्रेक्ष्य

सेगुर पठारी हाथी कॉरिडोर, जो तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के जंगलों को जोड़ता है, को 2019 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्थापित एक विशेष समिति द्वारा मूल्यांकन किया गया था। इस समिति ने 12 अवैध रिसॉर्टों को ध्वस्त करने का आदेश दिया, लेकिन कई मामलों में कार्यवाही टलती रही। इस बीच, मद्रास हाई कोर्ट ने इन विवादों को सुनवाई के लिए विशेष बेंच स्थापित कर ली थी, जिससे NGT ने सीधे ध्वस्त करने के मुद्दे पर टिप्पणी करने से बचा।

NGT के आदेश का महत्व

त्रिब्यूनल के न्यायाधीश पुष्पा सत्यनारायण और विशेषज्ञ सदस्य प्रशांत गरगवा ने यह स्पष्ट किया कि कॉरिडोर की जीवविज्ञानिक अखंडता को सुरक्षित रखना सबसे प्राथमिकता है। उन्होंने आदेश दिया कि सभी सील किए गए भवनों को बंद रखा जाए, नई निर्माण या वाणिज्यिक गतिविधियों को प्रतिबंधित किया जाए, और नियमित निरीक्षण द्वारा हाथियों की मुक्त आवाज़ सुनिश्चित की जाए। यह कदम न केवल जैव विविधता की रक्षा करता है, बल्कि मानव-हाथी संघर्ष को भी कम करने की दिशा में एक सक्रिय कदम है।

विस्तृत प्रभाव और भविष्य की दिशा

सेगुर कॉरिडोर में अनधिकृत निर्माण के कारण वन्यजीवों के अभ्यावकाश में बाधा उत्पन्न हुई थी, जिससे इलेक्ट्रोकेशन, अवैध बाड़ और अन्य मानवीय कारणों से हाथियों की मौतें बढ़ी थीं। NGT के आदेश के बाद, राज्य प्रशासन को अब नियमित रूप से बाड़ हटाने, विद्युत लाइनों की सुरक्षा जाँच, और स्थानीय समुदायों को संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाने होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशा में ठोस कार्यवाही जारी रही, तो नीलगिरी बायोस्फीयर में मानव-हाथी टकराव की संभावनाएं काफी घट जाएँगी।

सारांश

NGT का यह आदेश पर्यावरण संरक्षण के लिए एक मजबूत संकेत है, जो कानूनी जटिलताओं के बीच भी वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है। यह दर्शाता है कि भविष्य में भी पर्यावरणीय न्यायालयों को वन्यजीव मार्गों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी पड़ेगी।