चेंनई महानगर निगम ने परंबूर‑वायसरपड़ी, अंबत्तूर और गिंडी औद्योगिक क्षेत्रों में 80 किमी सड़कों का नवीनीकरण करने के लिए ₹1.18 करोड़ आवंटित किए हैं। इस योजना में ट्रांज़िट एकीकरण, जल निकासी सुधार, हरित पहल और ऊर्जा‑कुशल प्रकाश व्यवस्था शामिल है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 80 किमी सड़कों का व्यापक नवीनीकरण
- ₹1.18 करोड़ का बजट, तीन औद्योगिक क्षेत्रों को शामिल
- सार्वजनिक परिवहन, जल निकासी, हरित पहल और ऊर्जा‑कुशल प्रकाश व्यवस्था पर जोर
चेंनई महानगर निगम (जीसीसी) ने शहर के तीन प्रमुख क्षेत्रों – परंबूर‑वायसरपड़ी, अंबत्तूर और गिंडी औद्योगिक एस्टेट्स – में 80 किलोमीटर सड़कों के आधुनिकीकरण के लिए विस्तृत योजना तैयार की है। कुल अनुमानित खर्च लगभग ₹1.18 करोड़ है, जो भारतीय रोड कांग्रेस (IRC) मानकों के अनुरूप विस्तृत डिजाइन, पुनर्निर्माण और अतिरिक्त बुनियादी सुविधाओं को सम्मिलित करता है।
पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व
परंबूर‑वायसरपड़ी क्षेत्र, 15 वर्ग किलोमीटर के अध्ययन क्षेत्र में 20 किलोमीटर सड़कों को कवर करता है और यहाँ घनी आवासीय तथा औद्योगिक संरचना के कारण यातायात जाम की समस्या दीर्घकालिक रही है। इस परियोजना को शहरी चुनौती निधि (Urban Challenge Fund) के तहत प्राथमिकता दी गई है, जिससे न केवल सड़क की गुणवत्ता बल्कि समग्र जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।
अंबत्तूर औद्योगिक एस्टेट की विस्तृत योजना
1,167 एकड़ में फैला अंबत्तूर औद्योगिक एस्टेट लगभग 1,800 इकाईयों का घर है। इस क्षेत्र में 40 किलोमीटर की सड़कों, 240 जल निकासी प्रणाली (कुल 40 किमी) और 1,890 स्ट्रीट लाइट्स की मौजूदगी को ध्यान में रखते हुए, जीसीसी ने समान रूप से ₹47.20 लाख की परामर्श लागत निर्धारित की है। इस चरण में सड़क का पुनर्निर्माण, जल निकासी की क्षमताओं को बढ़ाना और ऊर्जा‑कुशल LED प्रकाश व्यवस्था स्थापित करना प्रमुख कार्य होंगे।
गिंडी औद्योगिक एस्टेट में लक्ष्य
गिंडी एस्टेट, 404.08 एकड़ में लगभग 700 उद्योगों को समेटे हुए है, जहाँ 20 किलोमीटर सड़कों, 82 मुख्य मार्गों और 23.5 किमी जल निकासी नेटवर्क को आधुनिक बनाना योजना का मुख्य बिंदु है। इस परियोजना के लिए ₹23.60 लाख परामर्श शुल्क निर्धारित किया गया है, और यह भी तमिलनाडु स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (TSIDCOL) के साथ समझौते के तहत आगे बढ़ेगा।
समग्र दृष्टिकोण और भविष्य की राह
जीसीसी ने एकीकृत, बहु‑आयामी परामर्श फर्म या कंसोर्टियम को नियुक्त करने की योजना बनाई है, ताकि ‘विस्तृत सड़क बुनियादी ढांचा उन्नयन योजना, डिजाइन और कार्यान्वयन रणनीति’ तैयार की जा सके। इस रणनीति में गतिशीलता, जल निकासी, सार्वजनिक स्थान, पर्यावरणीय सुधार और राजस्व‑सृजनात्मक उपायों को सम्मिलित किया जाएगा। यदि यह पहल सफल होती है, तो यह शहरी बुनियादी ढांचे के लिए एक मॉडल बन सकता है, जिससे अन्य भारतीय नगरपालिकाओं में समान “समग्र” दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है।