अंध्र प्रदेश को इस साल एक मजबूत एल नीनो का सामना करना पड़ सकता है, जिससे लगातार उच्च तापमान और वर्षा में गिरावट आएगी। राज्य की आपदा प्रबंधन और कृषि नीतियों की प्रभावशीलता अब गंभीर परीक्षा में है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- एल नीनो की संभावना के कारण गर्मी की लहरें और कम वर्षा का खतरा बढ़ा है।
- वर्षा में 42% की कमी से 26 में से 28 जिलों में फसल जोखिम बढ़ा है।
- सरकारी चेतावनियों का ग्रामीण स्तर पर समय पर पहुंचना, प्रभावी राहत के लिए निर्णायक है।
पश्चिमी समुद्र में सतही जल तापमान के दो डिग्री से अधिक बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय मौसम विज्ञान संस्थानों द्वारा इसे "बहुत मजबूत" एल नीनो कहा जाता है। 1951‑2025 के बीच यह सीमा चार बार पार हुई – 1972, 1982, 2015 और 2023 – और विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में भी इसी स्तर का एक और घटना सामने आ सकती है।
पिछले एल नीनो के सबक
2015 में आया तीव्र एल नीनो भारत में 2,300 से अधिक मौतों का कारण बना, जिसमें अंध्र प्रदेश ने अकेले 1,369 मौतें दर्ज कीं। इस त्रासदी ने राज्य में अंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (APSDMA) की स्थापना को प्रेरित किया। 2023 में वही प्रवृत्ति दोहराई गई, परंतु बेहतर स्वास्थ्य उपायों के कारण मौतों की संख्या केवल तीन तक घट गई।
वर्तमान मौसम स्थिति
इंडियन मेटियोरोलॉजिकल डिपार्टमेंट (IMD) ने 12 जुलाई को फिर से गर्मी की चेतावनी जारी की है। मौसमी पूर्वानुमान दर्शाते हैं कि दक्षिण-पश्चिमी मानसून में वर्षा औसत से नीचे रहेगी, जबकि केवल दो जिलों में सामान्य वर्षा दर्ज हुई है। 1 जून से 11 जुलाई तक राज्य ने केवल 86.2 mm वर्षा प्राप्त की, जबकि सामान्य स्तर 149.1 mm होना चाहिए था – यानी 42.2 % की कमी।
कृषि पर प्रभाव और सरकारी उपाय
बारिश की कमी का सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है; 2023 में 54 मंडल को सूखा‑पीड़ित घोषित किया गया और लगभग 6.96 लाख भूमि मालिकों को नुक़सान हुआ। राज्य के गृह एवं आपदा प्रबंधन मंत्री वी. अनिता ने गांव स्तर पर मौसम सूचना का प्रसार करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि फसल क्षति को न्यूनतम किया जा सके। हालांकि, कृषि विभाग द्वारा agro‑climatic zones के आधार पर जारी किए गए अलर्ट अक्सर वास्तविक परिस्थितियों से मेल नहीं खाते, जिससे सलाह और जमीन की वास्तविकता में अंतर उत्पन्न होता है।
आगे की राह
सरकार ने रेगिस्तान‑सहिष्णु फसलों की ओर बदलाव की चेतावनी जारी की है, विशेषकर रायलासेमा के बारिश‑निर्भर क्षेत्रों में। लेकिन किसानों की स्वीकृति और आर्थिक क्षमता अभी भी अनिश्चित है। यदि समय पर और सटीक मौसम सलाह पहुंचाने की प्रणाली में सुधार नहीं किया गया, तो एल नीनो के संभावित दुष्प्रभाव को कम करना कठिन रहेगा।