दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने AI‑संचालित डस्ट पोर्टल 2.0 को लॉन्च किया, जिससे निर्माण स्थल से उत्पन्न धूल प्रदूषण की वास्तविक‑समय निगरानी और त्वरित कार्रवाई संभव होगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • AI‑डस्ट पोर्टल 2.0 निर्माण धूल की रीयल‑टाइम निगरानी करता है।
  • 360‑डिग्री कैमरे और सेंसर से प्राप्त अलर्ट सीधे दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति को भेजे जाते हैं।
  • पोर्टल मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए पारदर्शी डेटा उपलब्ध कराता है, जिससे प्रवर्तन तेज़ होता है।

नई दिल्ली – दिल्ली के मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) द्वारा विकसित AI‑संचालित डस्ट पोर्टल 2.0 का आधिकारिक उद्घाटन किया। यह डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म निर्माण‑संबंधी धूल प्रदूषण की वास्तविक‑समय निगरानी, स्वचालित अलर्ट और तेज़ प्रवर्तन के लिए डिज़ाइन किया गया है। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि इस प्रणाली से शहर के 1,800 निर्माण साइटों में से 800‑900 सक्रिय साइटों की स्थिति तुरंत ट्रैक की जा सकेगी।

पृष्ठभूमि: दिल्ली की वायु प्रदूषण की चुनौती

पिछले कई वर्षों में दिल्ली ने धुएँ, धूल, और कण‑आधारित प्रदूषण के कारण गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सामना किया है। विशेषकर निर्माण कार्यों से उत्पन्न धूल ने शहर के PM2.5 स्तर को लगातार बढ़ाया है, जिससे नागरिकों में श्वसन रोगों की दर में वृद्धि देखी गई है। पहले इस समस्या को मैन्युअल निरीक्षण, समय‑समय पर रिपोर्ट और सीमित सेंसर नेटवर्क पर निर्भर किया जाता था, जिससे तेज़ कार्रवाई में देरी होती थी।

तकनीकी विवरण: AI, कैमरा और सेंसर का समन्वय

डस्ट पोर्टल 2.0 में 360‑डिग्री कैमरे, पर्यावरणीय सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एल्गोरिदम का इंटीग्रेशन किया गया है। प्रत्येक सक्रिय निर्माण स्थल पर स्थापित कैमरों से निरंतर वीडियो फ़ीड और धूल स्तर डेटा DPCC के केंद्रीकृत डैशबोर्ड पर भेजा जाता है। AI मॉडल असामान्य धूल स्तरों का पता लगाते ही तुरंत अलर्ट जारी करता है, साथ ही यदि कोई सेंसर विफल हो जाए तो तकनीकी टीम को सूचित करता है। पोर्टल अब मोबाइल एप्लिकेशन के रूप में भी उपलब्ध है, जिससे अधिकारी और नागरिक दोनों को साइट‑विशिष्ट डेटा, जैसे इमारत की मंज़िल संख्या और धूल उत्सर्जन स्तर, आसानी से मिल सके।

अपेक्षित प्रभाव और लाभ

इस पहल से नियामक प्रवर्तन में तेज़ी, पारदर्शिता और जवाबदेही में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। वास्तविक‑समय अलर्ट के माध्यम से उल्लंघनकर्ताओं पर तुरंत जुर्माना या कार्यवाही लागू की जा सकेगी, जिससे निर्माण साइटों में धूल नियंत्रण उपायों का अनुपालन बढ़ेगा। दीर्घकालिक रूप से यह वायु गुणवत्ता में सुधार, श्वसन रोगों की कमी और नागरिकों के जीवन स्तर में उन्नति का कारण बन सकता है। साथ ही, विश्व बैंक के सहयोग से चल रहे सात‑वर्षीय “Clean Air, Healthy Delhi” कार्यक्रम के साथ यह पोर्टल एक रणनीतिक कदम के रूप में कार्य करेगा।

भविष्य की दिशा

डस्ट पोर्टल 2.0 के लॉन्च के बाद, दिल्ली सरकार ने इसकी कार्यक्षमता को अन्य पर्यावरण‑संबंधी डैशबोर्ड, जैसे ट्रैफ़िक‑जनित धुएँ और औद्योगिक उत्सर्जन, के साथ एकीकृत करने की योजना बनाई है। यदि इस तकनीकी ढाँचे को सफलतापूर्वक स्केल किया गया, तो यह भारत के अन्य महानगरों में समान समाधान के लिए मानक स्थापित कर सकता है।