राजस्थान सरकार ने थार रेगिस्तान में 28 किलोमीटर लंबा प्लास्टिक-लाइन किया कृत्रिम जलाशय बनाया, जो जैसलमेर‑बारमेर के 5 मिलियन नागरिकों को जल आपूर्ति सुनिश्चित करेगा। यह परियोजना जुलाई 2026 में औपचारिक रूप से उद्घाटन होगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • 28 किमी लंबा कृत्रिम झील, प्लास्टिक लाइनिंग के साथ
  • जैसलमेर‑बारमेर में 5 मिलियन लोगों को जल सुरक्षा
  • जल आपूर्ति में निरंतरता, विशेषकर नहर मरम्मत के दौरान

राजस्थान सरकार ने थार रेगिस्तान के कठोर जलवायु में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए 28 किलोमीटर लंबा, 4 मीटर गहरा कृत्रिम जलाशय निर्मित किया है। इस जलाशय को विशेष प्रकार के प्लास्टिक शीट से लाइन किया गया है, जिससे जल वाष्पीकरण को न्यूनतम किया जा सके और जल की बचत सुनिश्चित हो।

परियोजना का उद्देश्य और महत्व

जैसलमेर और बारमेर के दो प्रमुख जिलों में लगभग पाँच मिलियन लोग इस जलस्रोत पर निर्भर करेंगे। रेगिस्तान में लगातार सूखे और नहरों की मरम्मत के कारण जल आपूर्ति में अनियमितता बनी रहती है; इस नई झील से नहरों की मरम्मत के दौरान भी निरंतर जल प्रवाह संभव होगा। इस पहल को जल सुरक्षा, कृषि उत्पादन में स्थिरता और जल‑संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

पिछली पृष्ठभूमि और तकनीकी चुनौतियाँ

थार के कठोर जलवायु में जलाशय बनाना पहले कई बार असफल रहा था, मुख्य कारण अत्यधिक वाष्पीकरण और सूखे की अवधि। वैज्ञानिकों ने इस बार विशेष उच्च‑गुणवत्ता वाले पॉलीथिन शीट का उपयोग किया, जो 99% तक जल को रोकती है। इसके अलावा, जलाशय के किनारे पर सौर पैनल स्थापित किए गए हैं, जो जलस्रोत के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में मदद करेंगे।

आर्थिक और सामाजिक प्रभाव

जलप्रभावी कृषि, पशुपालन और स्थानीय उद्योगों को इस झील से लाभ होगा। अनुमानित है कि जल उपलब्धता में 30% वृद्धि से वर्षा‑सिंचित क्षेत्रों में फसल उत्पादन में 15% तक वृद्धि हो सकती है। साथ ही, जल‑सेवा में सुधार से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे, विशेषकर जल संचयन एवं जल प्रबंधन के क्षेत्रों में।

उद्घाटन और भविष्य की योजना

राज्य सरकार ने इस जल परियोजना का औपचारिक उद्घाटन जुलाई 2026 में निर्धारित किया है। उद्घाटन समारोह में राजकीय प्रमुख, जल विज्ञान विशेषज्ञ और स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधि उपस्थित होंगे। इस मॉडल को भविष्य में राजस्थान के अन्य जल‑कठिन क्षेत्रों में दोहराने की योजना है, जिससे राज्य के जल‑सुरक्षा को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ किया जा सके।