IIT कानपुर के शोध में पता चला कि 20% इथेनॉल मिश्रित ई20 पेट्रोल से माइलेज में अधिकतम 5% तक की मामूली कमी होती है, लेकिन यह किसी भी प्रकार की इंजन क्षति नहीं करता। यह परिणाम सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को खारिज करता है और ईंधन नीति के लिए वैज्ञानिक समर्थन प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- E20 पेट्रोल से माइलेज में अधिकतम 5% तक की मामूली कमी
- इंजन में कोई जंग, क्षति या तकनीकी समस्या नहीं पाई गई
- ड्राइविंग शैली, सड़क की स्थिति और रखरखाव अधिक असरदार कारक हैं
भारत सरकार ने हाल ही में 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल, अर्थात् E20, को “साफ़, उच्च‑गुणवत्ता और अधिक दक्षता वाला ईंधन” घोषित किया है। इस घोषणा के बाद कई सोशल‑मीडिया पोस्ट और अनौपचारिक रिपोर्टें यह दावा कर रही थीं कि E20 वाहन की माइलेज को घटा देगा और इंजन को नुकसान पहुंचाएगा। ऐसी ही चिंताओं के बीच, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर के इंजिन रिसर्च लैबोरेटरी ने विस्तृत परीक्षण करके इस मिथक को तोड़ा है।
परीक्षण प्रक्रिया और प्रमुख निष्कर्ष
IIT कानपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोजेक्ट वैज्ञानिक ध्रुव राज कराना ने बताया कि institute‑level परीक्षण में E20 के उपयोग से फ्यूल इफ़िशिएंसी में गिरावट 5% से कम रही। उन्होंने कहा, “यह गिरावट अन्य बाह्य कारकों जैसे ड्राइविंग पैटर्न, सड़क की गुणवत्ता और वाहन रख‑रखाव के कारण भी हो सकती है, न कि ईंधन की वजह से।” अधिकतर परीक्षणों में, ई20 ने इंजन में जंग, कॉरोजन या किसी भी प्रकार की तकनीकी त्रुटि नहीं दिखाई।
इथेनॉल‑ब्लेंडेड ईंधन का इतिहास और नीति पृष्ठभूमि
भारत में इथेनॉल‑ब्लेंडेड पेट्रोल का प्रयोग 2000 के दशक से शुरू हुआ, जब पहली बार E10 (10% इथेनॉल) को राष्ट्रीय स्तर पर लागू किया गया। पर्यावरणीय लाभ—जैसे कार्बन उत्सर्जन में कमी—और आयात‑निर्भरता घटाने के उद्देश्य से सरकार ने धीरे‑धीरे ब्लेंड प्रतिशत बढ़ाने की योजना बनाई। E20 को अपनाने का मुख्य कारण घरेलू इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना है। इस कदम को कई ऑटोमोबाइल निर्माताओं और पेट्रोलियम मंत्रालय ने “वर्षों की वैज्ञानिक जांच” के बाद समर्थन दिया है।
व्यावहारिक प्रभाव और भविष्य की राह
कराना ने मोटर चालकों को सलाह दी है कि वे अपने वाहन के मैनुअल और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करें, न कि अनजाने सोशल‑मीडिया पोस्ट पर भरोसा करें। उन्होंने यह भी बताया कि IIT कानपुर ने E85 (85% इथेनॉल) जैसे उच्च ब्लेंड पर भी सफल परीक्षण किए हैं, परंतु ऐसे ईंधन के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए इंजन और फ्यूल सिस्टम की आवश्यकता होगी। इस प्रकार, वर्तमान में E20 अधिकांश मौजूदा वाहनों के लिए सुरक्षित विकल्प बनता है, जबकि भविष्य में अधिक उच्च इथेनॉल ब्लेंड की संभावनाएँ खुली हैं।
निष्कर्ष
समग्र रूप में, IIT कानपुर के शोध ने साबित किया है कि E20 पेट्रोल न तो माइलेज में उल्लेखनीय कमी लाता है और न ही इंजन को नुकसान पहुंचाता है। यह निष्कर्ष नीतिगत निर्णयों को वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है और आम जनता के बीच ईंधन की सुरक्षा संबंधी गलतफहमियों को दूर करता है।