कर्नाटक के सार्वजनिक कार्य मंत्री सतीश जारखी ने हवेरि जिले में 88 टैंकों को भरने की योजना को rain‑deficit वर्षों में जलसंकट को कम करने के समाधान के रूप में बताया। यह परियोजना तुंगा व वरदा नदियों पर चेक‑डैम निर्माण और जल‑संचयन को सुदृढ़ करेगी।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • हवेरि में 88 टैंकों को भरने की ₹185 करोड़ की योजना शुरू।
  • तुंगा‑वरदा नदियों पर चेक‑डैम निर्माण से जल‑संसाधन का स्थायी प्रबंधन।
  • वर्षा‑कमी के दौरान किसान, पशुपालक और ग्रामीण जनजीवन को लाभ।

कर्नाटक के सार्वजनिक कार्य (PWD) मंत्री सतीश जारखी ने 14 जुलाई को हवेरि जिले के हायरकेरूर व रत्तिहली तालुकों में 88 टैंकों को भरने की विस्तृत योजना का निरीक्षण किया। यह पहल राज्य की जल‑संकट निवारण रणनीति का अभिन्न भाग है, विशेषकर उन वर्षों में जब मौसमी वर्षा में कमी देखी जाती है।

परियोजना का दायरा और वित्तीय पहलू

2019 में जारी सरकारी आदेश के तहत 185 करोड़ रुपये की मंजूरी मिली थी। इस राशि से कुल 671.67 मिलियन क्यूबिक फ़ीट (CFt) जल संग्रहण क्षमता का निर्माण किया गया, जिसमें अब तक 345.50 मिलियन CFt की संरचना तैयार हो चुकी है। टैंकों को भरने के लिए तुंगभद्र नदी के निकट स्थित उक्कडागत्री (हरिहर तालुका) से जल निकाला जाएगा।

चेक‑डैम और ग्राउंड‑वॉटर टेबल सुधार

हवेरि जिले में तुंगा, वरदा और तुंगभद्र तीन प्रमुख नदियाँ बहती हैं, जो कृषि सिंचाई के लिए महत्वपूर्ण हैं। सरकार ने इन नदियों पर चेक‑डैम निर्माण की योजना भी तैयार की है, जिससे न केवल सतही जल का संचयन होगा बल्कि ग्राउंड‑वॉटर टेबल भी ऊँचा रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दो‑तरफ़ा जल‑प्रबंधन मॉडल दीर्घकालिक जल‑सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

स्थानीय प्रशासन और कार्यान्वयन की प्रगति

निरीक्षण के दौरान जारखी ने अधिकारियों से टैंक‑भरण की प्रगति, पंप हाउस संचालन और मोटर कमिशनिंग की स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी ली। 8 जुलाई को तीन मोटरें चालू की गईं, जिससे टैंकों में जल प्रवाह शुरू हो गया। अतिरिक्त रूप से 66 kV ट्रांसमिशन लाइन और पावर सब‑स्टेशन की स्थापना भी पूरी हो चुकी है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति में निरंतरता बनी रहेगी।

किसानों और ग्रामीण समुदायों पर अपेक्षित प्रभाव

बारिश‑कमी के दौर में जल‑संकट अक्सर फसल‑नुकसान और पशुधन के लिए पानी की कमी का कारण बनता है। टैंकों का भराव न केवल कृषि जल की उपलब्धता बढ़ाएगा, बल्कि पशुपालन, पेयजल और घरेलू उपयोग के लिए भी स्थायी स्रोत प्रदान करेगा। इस पहल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में स्थिरता आएगी और जल‑संबंधी सामाजिक तनाव कम होगा।

हवेरि में इस प्रकार की जल‑संकलन परियोजनाएँ कर्नाटक सरकार की जल‑सुरक्षा रणनीति के तहत प्रमुख बिंदु बन गई हैं, और यदि सफलतापूर्वक लागू हो गईं तो अन्य जल‑संकट‑ग्रस्त जिलों के लिए मॉडल स्थापित कर सकती हैं।