केरल हाई कोर्ट ने लाइबेरिया ध्वजधारी कंटेनर जहाज़ MSC Elsa‑3 के डूबने के बाद hazardous cargo वाले कंटेनरों की स्थिति पर रक्षा मंत्रालय को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। लगभग 84 कंटेनर समुद्र‑तल में अंशतः दफ़न पाए गए, जिनमें से कई में संरचनात्मक क्षति देखी गई।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • केरल हाई कोर्ट ने MSC Elsa‑3 के कंटेनरों की स्थिति पर रक्षा मंत्रालय को रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।
  • लगभग 84 कंटेनर समुद्री तल में अंशतः दफ़न हैं, कई में संरचनात्मक क्षति पाई गई।
  • भारतीय नौसेना के गहन समुद्र डुबकी और बचाव क्षमताओं को इस मामले में उपयोग करने की संभावना है।

केरल हाई कोर्ट ने 15 जुलाई को एक विभाजन बेंच द्वारा रक्षा मंत्रालय को निर्देशित किया कि वह MSC Elsa‑3 के hazardous cargo वाले कंटेनरों की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे। यह आदेश अलप्पुझा के तट के पास मई 2025 में डूबे लिबेरिया‑ध्वजधारी कंटेनर जहाज़ के बाद आया, जब समुद्र में 2,000 से अधिक कंटेनर बिखर गए थे।

पर्यावरणीय सर्वेक्षण और स्वतंत्र सत्यापन की मांग

राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (NIO) ने एक प्रारम्भिक पर्यावरणीय नुकसान मूल्यांकन तथा दीर्घकालिक वैज्ञानिक अध्ययन का प्रस्ताव रखा था। कोर्ट ने कहा कि यह अध्ययन सर्वेक्षण रिपोर्टों के स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन का विकल्प नहीं हो सकता। इसलिए, MSC (Mediterranean Shipping Company) के स्वामित्व वाले जहाज़ के रिपोर्टों की एक स्वतंत्र विशेषज्ञ संस्था द्वारा जाँच अनिवार्य है।

कंटेनरों की वर्तमान स्थिति और संभावित खतरा

सर्वेक्षण रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 84 कंटेनर समुद्र‑तल में आंशिक रूप से दफ़न हैं, जबकि कई कंटेनर की संरचना में दरारें और क्षति पाई गई है। मुख्य चिंता यह है कि इन कंटेनरों के दरवाज़े अभी भी टेथर (tether) से बंधे हैं या नहीं, क्योंकि टेथर टूटने पर विषाक्त पदार्थ समुद्री जीवन और तटीय समुदायों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

भारतीय नौसेना की भूमिका

अमिकस क्यूरिए ने कोर्ट को सूचित किया कि भारतीय नौसेना के पास गहन‑समुद्र डाइविंग, रिमोटली ऑपरेटेड वेहिकल (ROV) आधारित जलजली हस्तक्षेप, तथा जटिल बचाव कार्यों में आवश्यक विशेषज्ञता है। विशेष रूप से, INS Nistar, भारत की पहली स्वदेशी डिज़ाइन की गई डाइविंग सपोर्ट वैसिल, गहरे समुद्र में सैचुरेशन डाइविंग, बचाव और पुनर्प्राप्ति कार्यों के लिए तैयार है। नौसेना की यह तकनीकी क्षमता इस मामले में स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन को तेज़ और विश्वसनीय बना सकती है।

भविष्य के निहितार्थ और निगरानी

कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि कंटेनरों में मौजूद hazardous cargo (जैसे रासायनिक पदार्थ या पेट्रोलियम) समुद्र में रिसाव करता है, तो यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, मत्स्य उद्योग और तटीय पर्यटन पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, निरंतर पर्यावरणीय निगरानी, स्थानीय समुदायों के साथ संवाद, और संभावित पुनर्प्राप्ति योजनाओं की त्वरित तैयारी अनिवार्य होगी। इस दिशा में रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट, साथ ही NIO और भारतीय नौसेना की संयुक्त कार्रवाई, भविष्य में समान समुद्री दुर्घटनाओं के प्रबंधन के लिए एक मानक स्थापित कर सकती है।