केरल के पायननूर में बेबी मेमोरियल अस्पताल के एनेस्थेटिशियन डॉ. अंजली पोडुवाल के खिलाफ 125 भारतीय न्याय संहिता धारा के तहत मामला दर्ज किया गया है। एक साल के बच्चे को एनेस्थीसिया में लापरवाही के कारण मस्तिष्क क्षति और वेंटिलेटर पर जीवनरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

केरल के कन्नूर जिले के पायननूर में स्थित बेबी मेमोरियल अस्पताल में एनेस्थेटिशियन डॉ. अंजली पोडुवाल के खिलाफ मेडिकल लापरवाही का आरोप लगा है। पायननूर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125 के तहत मामला दर्ज किया, जिसमें एक वर्ष पाँच महीने के टॉडलर देवांश शौर्य को एनेस्थीसिया के दौरान अत्यधिक मात्रा में दवा देने से गंभीर मस्तिष्क क्षति हुई बताई गई है।

घटना का क्रम

5 जुलाई को एरमाम के नडुविलेकुनी गांव में खेलते समय बच्चा गिर गया और उसके होंठ में चोट लगी। परिवार ने तुरंत बेबी मेमोरियल अस्पताल, पायननूर में उपचार करवाई। डॉक्टरों ने चोट की सिलाई के लिए एनेस्थीसिया देने का प्रस्ताव रखा। शिकायतकर्ता के. राजीवन के अनुसार, एनेस्थीसिया देने के बाद बच्चा तुरंत बेहोश हो गया और उसकी स्थिति बिगड़ते ही उसे कन्नूर के मुख्य अस्पताल में ले जाया गया। वर्तमान में बच्चा आईसीयू में वेंटिलेटर पर जीवनरक्षा कर रहा है।

परिवार की दलीलें

परिवार ने आरोप लगाया कि डॉक्टर ने एनेस्थीसिया की खुराक अधिक दी, जिससे बच्चा कार्डियक एरिस्ट और बाद में मस्तिष्क क्षति का शिकार हुआ। उन्होंने कहा कि यह त्रुटि केवल दवा की मात्रा में नहीं, बल्कि निगरानी में भी कमी का परिणाम थी। इस घटना के बाद स्थानीय समुदाय में अस्पताल के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए।

अस्पताल का प्रतिवाद

बेबी मेमोरियल अस्पताल ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चा एनेस्थीसिया के बाद तुरंत कार्डियक एरिस्ट से गुजर गया, जिसके बाद उसे तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया और सभी आवश्यक आपातकालीन उपचार प्रदान किए गए। अस्पताल ने यह भी कहा कि एनेस्थीसिया में कभी‑कभी खुराक चाहे जितनी भी हो, जटिलताएँ हो सकती हैं और यह अनिवार्य नहीं कि लापरवाही का संकेत हो।

कानूनी पहलू और पूर्व उदाहरण

भारतीय न्याय प्रणाली में चिकित्सा लापरवाही के मामलों में 125 BNS धारा का प्रयोग अक्सर किया जाता है, जो विशेष रूप से बाल रोगियों के मामलों में गंभीर परिणामों को रोकने के लिए बनाई गई है। पिछले कुछ वर्षों में समान मामलों में न्यायालय ने अस्पतालों को भारी जुर्माना और मुआवजा देने का आदेश दिया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज हुई है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

बच्चों के जीवन में एनेस्थीसिया से जुड़ी त्रुटियाँ न केवल व्यक्तिगत परिवार को प्रभावित करती हैं, बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली की विश्वसनीयता को भी चुनौती देती हैं। इस मामले की जांच से भविष्य में एनेस्थीसिया प्रोटोकॉल की कड़ाई से निगरानी और अस्पतालों में जोखिम प्रबंधन के मानकों को सुदृढ़ करने की संभावना है।

आगे की संभावनाएँ

पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और अस्पताल के भीतर ऑडिट प्रक्रिया का आदेश दिया है। यदि लापरवाही सिद्ध होती है, तो डॉक्टर के खिलाफ पेशेवर प्रतिबंध और अस्पताल के खिलाफ नियामक कार्रवाई की संभावना है। साथ ही, इस घटना से अन्य निजी अस्पतालों में एनेस्थीसिया से संबंधित सुरक्षा उपायों को पुनः मूल्यांकन करने का दबाव बढ़ेगा।