हैदराबाद के निज़ाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (NIMS) ने अस्पताल प्रबंधन छात्रों और आरएमओ को सिक्स सिग्मा और फार्माकोविजिलेंस पर विशेष प्रशिक्षण दिया। इस पहल से भविष्य के स्वास्थ्य प्रशासकों की गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा में सुधार की उम्मीद है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • सिक्स सिग्मा प्रशिक्षण से अस्पताल प्रशासन में गुणवत्ता सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • फार्माकोविजिलेंस सत्र में एआई, रियल‑वर्ल्ड डेटा और नियामक अपडेट पर चर्चा हुई।
  • NIMS का लक्ष्य भविष्य के चिकित्सकों और प्रबंधकों को आधुनिक प्रबंधन कौशल से सशक्त बनाना है।

हैदराबाद स्थित निज़ाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (NIMS) ने शनिवार को दो प्रमुख प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए। पहला कार्यक्रम सिक्स सिग्मा पर केंद्रित था, जिसे मास्टर ऑफ हॉस्पिटल मैनेजमेंट (MHM) छात्रों और रेज़िडेंट मेडिकल ऑफिसर्स (RMOs) के लिए आयोजित किया गया। यह कार्यशाला NIMS के प्रशासन विभाग द्वारा आयोजित की गई और सिक्स सिग्मा प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. मार्था रमेेश ने इसे संचालित किया।

सिक्स सिग्मा का महत्व

NIMS के निदेशक राहुल देवराज ने कहा कि सिक्स सिग्मा पद्धति अस्पताल प्रशासन में गुणवत्ता मानकों को उन्नत करने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने छात्रों और चिकित्सकों से आग्रह किया कि वे आधुनिक प्रबंधन प्रथाओं को गहराई से समझें, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी में सुधार हो। इस प्रशिक्षण के माध्यम से भविष्य के अस्पताल प्रशासकों और मेडिकल अधिकारियों के कौशल को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया गया।

फार्माकोविजिलेंस पर सीपीडी सत्र

साथ ही क्लिनिकल फार्माकोलॉजी विभाग ने “फार्माकोविजिलेंस में वर्तमान प्रवृत्तियाँ: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रियल‑वर्ल्ड डेटा और नियामक अपडेट” शीर्षक से एक निरंतर व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यक्रम आयोजित किया। इस सत्र में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के संयुक्त ड्रग्स कंट्रोलर डॉ. आर. चंद्रशेखर ने मुख्य भाषण दिया। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नियामक विकासों पर प्रकाश डाला और नियामक प्राधिकरण, स्वास्थ्य पेशेवर, शैक्षणिक संस्थान और फार्मास्यूटिकल उद्योग के बीच निकट सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

भविष्य की दिशा

इन प्रशिक्षणों का उद्देश्य न केवल वर्तमान स्वास्थ्य प्रणाली की दक्षता को बढ़ाना है, बल्कि एक ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो डेटा‑ड्रिवेन, एआई‑सक्षम और नियामक रूप से जागरूक हो। जैसा कि भारत में स्वास्थ्य सेवा का विस्तार तेज़ी से हो रहा है, ऐसे कार्यक्रम नीतिगत सुधारों और रोगी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बुनियाद स्थापित करते हैं।