राजस्थान में मई से 18 महिलाओं की प्रसवोत्तर मृत्यु हुई, जबकि सात को गुर्दा विफलता के कारण डायलिसिस पर रखा गया। स्वास्थ्य मंत्री ने कारण स्पष्ट नहीं होने को मानते हुए जांच का आदेश दिया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- मई‑जुलाई 2026 में 18 माताओं की मृत्यु, 7 डायलिसिस पर
- भिलवाड़ा, कोटा, बीकानेर आदि में समानांतर मामलों की रिपोर्ट
- राज्य सरकार ने विशेषज्ञ टीम, रिकॉर्ड ऑडिट और दवा परीक्षण के साथ व्यापक जांच शुरू की
राजस्थान में पिछले दो महीनों में 18 महिलाओं की प्रसवोत्तर मृत्यु ने सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में गहरी चिंता उत्पन्न कर दी है। मई से अब तक दर्ज इन मौतों में से पाँच महिलाएँ भिलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के प्रसव विभाग में सी-सेक्शन के बाद आईसीयू में स्थानांतरित होने के बाद घातक जटिलताओं से पीड़ित हुईं। इसी अवधि में कोटा और बीकानेर के सरकारी अस्पतालों में भी समान घटनाएँ रिपोर्ट की गईं, जहाँ कई महिलाओं को किडनी फेल्योर हुआ और सात को डायलिसिस पर रखा गया।
पृष्ठभूमि और संभावित कारण
राजस्थान में मातृ मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है, लेकिन इस सत्र में अचानक वृद्धि ने अधिकारियों को अचंभित कर दिया। स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खीमसर ने कहा कि प्रारम्भिक अनुमान में अत्यधिक गर्मी को कारण माना गया था, परन्तु तापमान घटने के बाद भी घटनाएँ जारी रही। इस कारण से, विभाग ने जलवायु कारकों के अलावा संक्रमण, दवा की गुणवत्ता, तथा शल्य उपकरणों की स्टरलाइज़ेशन प्रक्रिया की भी जाँच शुरू कर ली है।
जांच की विस्तृत रूपरेखा
राज्य सरकार ने जयपुर से विशेषज्ञों की एक विशेष टीम गठित की है, जिसमें माइक्रोबायोलॉजी, सर्जरी, गायनेकोलॉजी और एनेस्थीसिया के प्रोफेशनल शामिल हैं। टीम को मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार प्रोटोकॉल, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली और उपयोग की गई दवाओं का ऑडिट करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, अस्पताल के प्रमुखों, सुपरिंटेंडेंट्स और वरिष्ठ अधिकारियों को भी मामलों पर चर्चा करने के लिये बुलाया गया है।
संरचनात्मक चुनौतियाँ और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
भिलवाड़ा अस्पताल में प्रतिदिन 30‑40 सी-सेक्शन होते हैं, जबकि उपलब्ध शल्य उपकरणों के सेट केवल आठ हैं। प्रत्येक सेट को पुन: उपयोग से पहले कम से कम तीन घंटे की स्टरलाइज़ेशन की आवश्यकता होती है, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। अस्पताल प्रशासन ने कहा कि ऑपरेशन थियेटर में एक नमूना परीक्षण में खराब गुणवत्ता पाई गई थी, लेकिन यह सीधे मृत्यु से जुड़ी नहीं है। इस बीच, पीड़ित परिवारों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है, और न्याय की मांग में अस्पताल के भीतर प्रदर्शन किए हैं।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य
विपक्षी कांग्रेस ने इस स्थिति को राजस्थान के सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली की “गहरी संकट” के रूप में उजागर किया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत ने कहा, “मातृ मृत्यु में इस वृद्धि से राज्य की स्वास्थ्य नीतियों में गंभीर असफलता स्पष्ट होती है।” इस प्रकार, जांच के परिणाम न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि राजकीय राजनीति में भी महत्वपूर्ण प्रभाव डालेंगे।