बनासकांठा के दांता सरकारी अस्पताल में ब्लड प्रेशर के इलाज के दौरान एक महिला मरीज को समाप्त हो चुकी ग्लूकोज की बोतल दी गई, जिससे शरीर में सूजन और संक्रमण हुआ। अस्पताल प्रशासन ने गलती स्वीकार कर नाइट ड्यूटी के डॉक्टर‑नर्स के खिलाफ कार्रवाई का वादा किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • दांता सरकारी अस्पताल में एक्सपायर्ड ग्लूकोज दी गई
  • मरीज को संक्रमण व सूजन का सामना करना पड़ा
  • हॉस्पिटल ने डॉक्टर‑नर्स के खिलाफ शो‑कोज नोटिस जारी करने की घोषणा की

दांता सरकारी अस्पताल, बनासकांठा (गुजरात) – रात के ड्यूटी में मौजूद चिकित्सा स्टाफ़ की लापरवाही के कारण एक महिला मरीज को समाप्त हो चुकी ग्लूकोज की 100 ml बोतल इंट्रावेनस (IV) के रूप में दी गई। यह घटना 14 जुलाई 2026 को उजागर हुई, जब मरीज के परिवार ने बोतल की एक्सपायरी डेट देखी और तुरंत अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की।

घटना का विस्तृत विवरण

मरीज को प्राइवेट हॉस्पिटल बंद होने के कारण दांता सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रक्तचाप के उपचार के दौरान नर्स ने ग्लूकोज की बोतल लगाई, लेकिन बाद में परिवार ने पाया कि बोतल की समाप्ति तिथि पहले ही बीत चुकी थी। इसके बाद मरीज के शरीर में तीव्र सूजन और संक्रमण के लक्षण उभरे, जिससे उसकी हालत अस्थिर हो गई। परिवार का आरोप है कि उस समय डॉक्टर उपलब्ध नहीं थे और नर्स मोबाइल में व्यस्त रहने के कारण लगभग आधे घंटे तक अनुपलब्ध रही।

हॉस्पिटल प्रशासन की प्रतिक्रिया

दांता CHC के सुपरिटेंडेंट डॉ. के.के. सिंह ने सार्वजनिक रूप से गलती स्वीकार की और बताया कि नियमित रूप से हर महीने की पहली तिथि को सभी दवाओं और IV फ्लुइड की एक्सपायरी डेट की जाँच की जाती है, लेकिन इस बार एक बोतल छूट गई। उन्होंने बताया कि मरीज की स्थिति अब स्थिर है और गंभीर दुष्प्रभाव नहीं हुए। नाइट ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्स के खिलाफ शो‑कोज नोटिस जारी किया जाएगा और मोबाइल उपयोग करने वाली नर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पृष्ठभूमि और संभावित प्रभाव

भारत में चिकित्सा लापरवाही के मामलों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है। ऐसी घटनाएँ न केवल रोगियों की जान को जोखिम में डालती हैं, बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली के प्रति सार्वजनिक विश्वास को भी क्षति पहुँचाती हैं। एक्सपायर्ड दवाओं का उपयोग अक्सर अपर्याप्त इन्वेंटरी प्रबंधन, प्रशिक्षण की कमी और निगरानी प्रणाली की कमजोरियों से जुड़ा होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों को डिजिटल ट्रैकिंग, बारकोड स्कैनिंग और नियमित ऑडिट जैसी तकनीकी उपाय अपनाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रुटियों को रोका जा सके।

कानूनी और सामाजिक पहलू

यदि मरीज को इस लापरवाही से स्थायी स्वास्थ्य हानि या मृत्यु का सामना करना पड़ता है, तो अस्पताल और जिम्मेदार स्टाफ़ को नागरिक मुकदमे का सामना करना पड़ सकता है। भारतीय दवाओं और चिकित्सा उपकरण अधिनियम (ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट) के तहत एक्सपायर्ड दवाओं का उपयोग अवैध माना जाता है और इसके लिए जुर्माना व जेल की सजा भी निर्धारित है। इस घटना ने राज्य स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क किया है कि वह सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में कठोर निरीक्षण लागू करे।

समग्र रूप से, दांता अस्पताल में हुई यह त्रुटि स्वास्थ्य सेवा में गुणवत्ता नियंत्रण की गंभीर आवश्यकता को उजागर करती है। भविष्य में रोगी सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल, निरंतर प्रशिक्षण और तकनीकी समर्थन अनिवार्य हैं।