महावैध बेटिंग ऐप के संस्थापक सौरभ चंद्राकर को ओमान की पुलिस ने गिरफ्तार कर ली है। भारत सरकार ने इंटरपोल रेड नोटिस के आधार पर उनका प्रत्यर्पण या निर्वासन माँगा है। इस केस में 1,700 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की गई है।

नई दिल्ली के अनुसार, महावैध ऐप के संस्थापक और मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान में रॉयल ओमान पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। चंद्राकर, जो छत्तीसगढ़ के रहने वाले 30 के दशक के हैं, को इंटरपोल की रेड नोटिस के आधार पर भारतीय प्रवर्तन एजेंसी (ED) और राज्य पुलिस ने वांछित किया था।

पृष्ठभूमि और संचालन मॉडल

महावैध ऐप को एक अंतरराष्ट्रीय जुआ‑सिंडिकेट के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डोमेन नामों जैसे “Tiger Exchange”, “Gold365” और “Laser247” के माध्यम से अवैध बेटिंग को सुविधाजनक बनाता था। इस नेटवर्क में ‘पैनल’ और ‘ब्रांच’ के रूप में कार्य करने वाले सहयोगियों की फ्रैंचाइज़ी मॉडल का उपयोग किया गया, जिससे भारत के विभिन्न हिस्सों में जुआ‑संबंधी गतिविधियों का विस्तार हुआ।

पहले की हिरासत और अंतरराष्ट्रीय गतिशीलता

ED ने बताया कि 2024 में चंद्राकर को दुबई में यूएई अधिकारियों ने गिरफ्तार किया था, परन्तु बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। उसी अवधि में उनके सहयोगी रवि उप्पाल को वानुआटू (दक्षिण‑प्रशांत का द्वीपसमूह) भागते हुए पकड़ा गया। नवीनतम जानकारी के अनुसार, चंद्राकर ने दक्षिण‑पूर्व एशिया के किसी देश के पासपोर्ट से यात्रा की थी, जिससे उनकी पहचान और प्रवास मार्ग पर सवाल उठते हैं।

भारत‑ओमान द्विपक्षीय सहयोग

भारत और ओमान के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं, और दोनों देशों ने 1 जून को मुक्त व्यापार समझौता लागू किया था, जो आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देता है। 2025‑26 वित्तीय वर्ष में दो‑तरफ़ा व्यापार लगभग 11.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचा। भारतीय अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि ओमान के साथ मिलकर चंद्राकर को प्रत्यर्पित या निर्वासित किया जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय अपराध नियंत्रण में एक नया precedent स्थापित होगा।

आर्थिक दायरे और संपत्ति जब्ती

मार्च में ED ने बताया कि उन्होंने चंद्राकर और उनके जुड़े संस्थानों की लगभग 1,700 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को जब्त कर लिया है, जिनमें दुबई के बुर्ज ख़लीफ़ा में स्थित संपत्तियां भी शामिल हैं। यह राशि महावैध केस में अनुमानित 6,000 करोड़ रुपये की कुल अवैध आय का छोटा हिस्सा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जुआ‑सिंडिकेट ने व्यापक वित्तीय धारा को कैसे चैनल किया।

कुल मिलाकर, चंद्राकर की गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती भारतीय प्रवर्तन एजेंसियों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग करने की क्षमता को दर्शाती है, जबकि यह दर्शाता है कि डिजिटल जुआ‑सिंडिकेट को कड़ी सजा मिलने की संभावना बढ़ी है।