प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी एल्बानिज़ से इन्डो‑पैसिफिक क्षेत्र, महत्वपूर्ण खनिजों और शैक्षिक साझेदारी पर बात करेंगे। यह उनका ऑस्ट्रेलिया का तीसरा दौरा और 12 साल बाद का पहला मेलबर्न यात्रा है, जो द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को नई गति देगा।

नई दिल्ली (दिव्यांग) – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपने तीसरे आधिकारिक दौरे पर ऑस्ट्रेलिया के राजधानी मेलबर्न में एंथोनी एल्बानिज़ के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन में मिलेंगे। दो देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से यह मुलाकात कई प्रमुख क्षेत्रों—इन्डो‑पैसिफिक सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला, और शैक्षिक सहयोग—पर केन्द्रित होगी।

इतिहास और रणनीतिक पृष्ठभूमि

भारत‑ऑस्ट्रेलिया संबंधों ने पिछले दो दशकों में तेज़ी से विकास किया है। 2014 में स्थापित व्यापक रणनीतिक साझेदारी को 2020 में ‘समग्र रणनीतिक साझेदारी’ में उन्नत किया गया, और 2024 में दोनों देशों ने क्वाड (QUAD) के भीतर सहयोग को गहरा किया। इस मुलाकात से पहले, मोदी ने 2014 में पहली बार ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया था, और 2018 में द्वितीय यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा‑तकनीकी समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। अब 12 साल बाद मेलबर्न में यह तीसरा दौरा, दोनों देशों को इन्डो‑पैसिफिक में एकजुट रणनीतिक बल के रूप में प्रस्तुत करता है।

इन्डो‑पैसिफिक विज़न और MAHASAGAR पहल

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जैसवाल ने बताया कि इस शिखर सम्मेलन में ‘MAHASAGAR’ (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions) पहल को आगे बढ़ाया जाएगा, जो क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री जागरूकता और छोटे द्वीप राष्ट्रों के विकास को लक्षित करती है। दोनों देशों की क्वाड‑साथी के रूप में भूमिका, चीन‑अमेरिका प्रतिस्पर्धा के बीच इन्डो‑पैसिफिक में संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आर्थिक और शैक्षिक सहयोग के नए आयाम

शिखर सम्मेलन के साथ ही 2026 भारत‑ऑस्ट्रेलिया सीईओ फ़ोरम का भी आयोजन होगा, जहाँ दोनों देशों के उद्योगपतियों को आपूर्ति श्रृंखला, विशेषकर लिथियम, ग्रेफ़ाइट और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों पर चर्चा करने का अवसर मिलेगा। इस पहल से दोनों देशों के व्यापार में अगले पाँच वर्षों में 15‑20% वृद्धि की उम्मीद है। शैक्षिक क्षेत्र में, फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी सहित आठ ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस स्थापित करने की मंजूरी मिल चुकी है, जिससे छात्र विनिमय और अनुसंधान सहयोग में नई संभावनाएँ उत्पन्न होंगी।

भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका

मोदी ने अपने ट्वीट में कहा, “मैं ऑस्ट्रेलिया में भारतीय प्रवासी समुदाय से मिलने का अवसर प्राप्त करूँगा, जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है।” वर्तमान में लगभग एक मिलियन भारतीय ऑस्ट्रेलिया में रह रहे हैं, जो देश की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रवासी समूहों में से एक है। इस जनसंख्या को आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनयिक पुल के रूप में उपयोग करना दोनों सरकारों की प्राथमिकता है।

ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर‑जनरल सैम मोस्टिन की विशेष यात्रा भी इस मुलाकात की महत्ता को दर्शाती है; यह दोनों देशों के बीच पारस्परिक सम्मान और रणनीतिक विश्वास का प्रतीक है। इस यात्रा के बाद, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत‑ऑस्ट्रेलिया संबंध न केवल द्विपक्षीय स्तर पर बल्कि व्यापक इन्डो‑पैसिफिक सुरक्षा ढांचे में भी एक प्रमुख स्तंभ बनेंगे।