एनकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के समापन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गठबंधन में अमेरिकी भागीदारी की पुष्टि की, जबकि पहले इरान‑संबंधी नीतियों पर तीखा विरोध किया था। इस बदलाव ने सदस्य देशों को ‘आर्टिकल 5’ की सुरक्षा गारंटी पर भरोसा दिलाया।

अंकरा में 8 जुलाई, 2026 को समाप्त हुए नाटो शिखर सम्मेलन में 32 सदस्य‑देशों के प्रमुखों ने आर्टिकल 5 के तहत परस्पर रक्षा के ‘लोहे जैसी प्रतिबद्धता’ को दोहराया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी बंद दरवाज़ों के पीछे इस गठबंधन के साथ अपनी निरंतरता की पुष्टि की, जिससे यूरोपीय सुरक्षा संरचना में स्थिरता का संकेत मिला।

शिखर सम्मेलन के मुख्य बिंदु

समारोह की आधिकारिक घोषणा में कहा गया कि “एक पर हमला सभी पर हमला है”, जो कि नाटो के मौलिक सिद्धांत को पुनः स्थापित करता है। इस घोषणा ने ट्रम्प द्वारा सार्वजनिक रूप से इरान और स्पेन के प्रति जताई गई नाराजगी के बाद अचानक बदलते स्वर को संतुलित किया।

ट्रम्प का रुख बदलना

समारोह से पहले ट्रम्प ने इरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को लेकर नाटो के सदस्यों को तीखा आलोचना किया, स्पेन के साथ व्यापारिक प्रतिबंध की धमकी दी और डेनमार्क के ग्रिनलैंड क्षेत्र पर अपने दावे दोहराए। लेकिन बंद दरवाज़ों के भीतर हुए निजी संवाद में उन्होंने “हम आप के साथ रहना चाहते हैं” कहा, जिससे उनकी सार्वजनिक और निजी बयानों में स्पष्ट अंतर दिखा।

नाटो पर संभावित प्रभाव

एस्टोनिया के प्रधान मंत्री क्रिस्टेन मिशाल ने ट्रम्प के शांत स्वर को “रचनात्मक संदेश” कहा, जबकि लिथुआनिया के विदेश मंत्री केस्तुतिस बुड्रिस ने इसको गठबंधन के टूटने का संकेत नहीं माना। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की द्विपक्षीय संवाद प्रक्रिया नाटो को यूरोपीय रक्षा खर्च बढ़ाने और अमेरिकी समर्थन को स्थिर रखने में मदद करेगी।

यूक्रेन को समर्थन और भविष्य की दिशा

शिखर सम्मेलन में यूक्रेन को वार्षिक 70 अरब यूरो (लगभग 80 अरब डॉलर) सैन्य सहायता की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई। ट्रम्प ने ज़ेलेंस्की को पैट्रियट एंटी‑एयर मिसाइलों के निर्माण लाइसेंस देने का वादा किया, जिससे रूसी बमबारी के खिलाफ यूक्रेनी रक्षा में सुधार की आशा है। साथ ही, सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल‑शराअ के साथ संभावित वार्तालापों की तैयारी भी संकेत देती है कि ट्रम्प अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि पुनर्स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, शिखर सम्मेलन ने नाटो के भविष्य को लेकर कई सवाल उठाए—अमेरिका की प्रतिबद्धता, यूरोप की रक्षा खर्च में वृद्धि, और यूक्रेन व मध्य‑पूर्व में अमेरिकी नीति की दिशा। ट्रम्प के अचानक बदलते रुख ने इस जटिल समीकरण में एक नया संतुलन स्थापित किया, जो आगे के महीनों में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर गहरा असर डाल सकता है।