डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ग्रेहम प्लेटनर के यौन उत्पीड़न के आरोपों के कारण राजीनामा करने के बाद, महामारी विशेषज्ञ निरव डी शाह ने मेन के यू.एस. सीनेट चुनाव में भाग लेने का ऐलान किया है। शाह, जो पूर्व CDC अधिकारी हैं, इस चुनौती का सामना करके रिपब्लिकन सुसन कॉलिन्स को हराने की कोशिश करेंगे।

डेमोक्रेटिक प्रत्याशी ग्रेहम प्लेटनर ने यौन उत्पीड़न के आरोपों को झूठा कह कर अपने सीनेट अभियान से हटने की घोषणा की, जिससे मेन में एक अचानक खाली स्थान बन गया। इस अवसर को पकड़ते हुए, पूर्व सीडीसी अधिकारी और महामारी विज्ञान विशेषज्ञ निरव डी शाह ने आधिकारिक तौर पर अपनी उम्मीदवारी दर्ज करवाई।

खाली पद का कारण और तत्काल प्रतिक्रिया

प्लेटनर ने बुधवार को यह कदम उठाया, जबकि वह डेमोक्रेटिक प्राथमिक में जीत चुके थे। उन्होंने आरोपों को "भ्रामक" कहा, परन्तु पार्टी को इस संकट से निपटने के लिए 27 जुलाई तक एक नया उम्मीदवार चुनना आवश्यक है। इस बीच, रिपब्लिकन सुसन कॉलिन्स, जो 1997 से मेन के सीनेट सीट पर हैं, पुनः चुनाव की तैयारी कर रही हैं।

निरव डी शाह की पेशेवर पृष्ठभूमि

शाह का करियर सार्वजनिक स्वास्थ्य के कई उच्च स्तरों पर फैला है। वह कोविड‑19 महामारी के दौरान मेन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के निदेशक रहे, और जो बाइडेन प्रशासन में यू.एस. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के प्रमुख उपनिदेशक के रूप में कार्य किया। इसके अलावा, उन्होंने इलिनोइस हेल्थ डिपार्टमेंट का निदेशालय भी संभाला। शैक्षणिक रूप से उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय से मेडिकल और लॉ डिग्री, और ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर किया है।

राजनीतिक माहौल और चुनौतियां

मेन का मतदान इतिहास अक्सर स्वतंत्र और डेमोक्रेटिक दोनों पक्षों के बीच संतुलन दर्शाता आया है। सुसन कॉलिन्स की निरंतर जीत ने रिपब्लिकन को एक मजबूत आधार दिया है, परन्तु निरव शाह का “आउटसाइडर” स्वर और मेडिकेयर फॉर ऑल जैसी प्रगतिशील नीतियों का समर्थन उन्हें युवा व प्रगतिशील मतदाताओं के बीच आकर्षित कर सकता है। उन्होंने X (ट्विटर) पर कहा, “स्थापित राजनेता हमें निराश कर चुके हैं; हमें एक ऐसा उम्मीदवार चाहिए जो प्रणाली के टूटे हुए हिस्से को सुधार सके।”

सिनेट पर संभावित प्रभाव

यदि शाह जीतते हैं, तो वे डेमोक्रेटिक बहुमत को मजबूत करेंगे, जबकि कॉलिन्स का हटना रिपब्लिकन को एक प्रमुख सीट से वंचित करेगा। यह चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित कर सकता है, क्योंकि भारतीय मूल के उम्मीदवारों की उपस्थिति अमेरिकी राजनीति में धीरे‑धीरे बढ़ रही है।

आगामी हफ़्तों में, डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धी नामांकन प्रक्रिया और शाह की कैंपेन रणनीति दोनों ही प्रमुख चर्चा का विषय बनेंगे। 27 जुलाई की अंतिम तिथि के बाद, मेन के मतदाता यह देखेंगे कि क्या “भविष्य का स्वास्थ्य विशेषज्ञ” कांग्रेस में अपना स्थान बना पाते हैं।