अमेरिकी भाड़े के सैनिक मैथ्यू वैंडाइक और अन्य पर भारत के प्रतिबंधित विद्रोही समूहों को हथियार और प्रशिक्षण देने का आरोप लगाया गया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान तिहारी जेल के भोजन की तीखी, तेलीय और समुद्री भोजन की कमी पर भी चर्चा हुई।

न्यायालय में चल रही सुनवाई में अमेरिकी भाड़े के सैनिक मैथ्यू वैंडाइक को भारत के प्रतिबंधित विद्रोही संगठनों को हथियार और प्रशिक्षण देने का गंभीर आरोप लगा है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि वैंडाइक ने कई महीनों तक असम, मिज़ोरम और म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में गुप्त मिशन किए, जहाँ उन्होंने स्थानीय उग्रविरोधी समूहों को सशस्त्र किया और रणनीतिक सलाह दी।

पृष्ठभूमि और यात्रा विवरण

वैंडाइक, जो पहले एक साहसिक पत्रकार और टेलीविजन प्रस्तुतकर्ता के रूप में प्रसिद्ध थे, कुछ वर्षों पहले निजी सुरक्षा कंपनियों में शामिल हो गया। जांच से पता चलता है कि वह 2022‑2023 में असम के डोब्रा घाटी, मिज़ोरम के चेरापु क्षेत्र और म्यांमार के राखाइन राज्य में लगातार रहकर स्थानीय विद्रोही समूहों के साथ संपर्क में रहे। इन क्षेत्रों में उनका मुख्य लक्ष्य समूहों को आधुनिक हथियारों, ग्रेनेड्स और सैद्धांतिक प्रशिक्षण से लैस करना था।

कानूनी प्रक्रिया और आरोप

अभियोजन ने कहा कि वैंडाइक ने भारतीय कानून के तहत प्रतिबंधित संगठनों को ‘सहयोग’ करने के लिये ‘आतंकवादी सहायता’ प्रदान की, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 121A के तहत दंडनीय है। साथ ही, उन्होंने विदेशी नागरिकों को भारत में ‘कानून तोड़ने’ वाले कार्यों में शामिल करने के लिए ‘आतंकवादी वित्तीय सहायता’ भी प्रदान की, जो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है।

तिहारी जेल के भोजन पर चर्चा

सुनवाई के दौरान, एक वकील ने अदालत को तिहारी जेल में कैदियों के भोजन की गुणवत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भोजन अत्यधिक तीखा, तेलीय और समुद्री भोजन जैसे झींगा या पास्ता जैसी विविधता से रहित है। यह शिकायत कई बार कोर्ट में दर्ज हुई है, लेकिन सुधारात्मक कार्रवाई में देरी की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन की पोषण संबंधी कमी कैदियों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकती है।

भविष्य के प्रभाव और संभावनाएँ

यदि इस मामले में वैंडाइक को दोषी पाया जाता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, विदेशी भाड़े के सैनिकों की नियामक नीति और भारत‑अमेरिका संबंधों पर गहरा असर डाल सकता है। साथ ही, तिहारी जेल के भोजन की स्थिति को लेकर सार्वजनिक दबाव बढ़ेगा, जिससे जेल प्रशासन को सुधारात्मक कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

अंततः, यह मामला न केवल एक व्यक्तिगत अपराध को उजागर करता है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जटिल परस्पर संबंधों को भी सामने लाता है।