माली की सेना ने उत्तर के रणनीतिक अनफ़िस बेस तक पहुँच फिर से सुनिश्चित की, जबकि अलगाववादी और अल-कायदा जुड़ी जैनिम समूहों ने बड़े पैमाने पर हमला किया। इस संघर्ष ने क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की जटिलताओं को उजागर किया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- माली सेना ने अनफ़िस बेस का घेराव तोड़ा, 12 युद्ध वाहन नष्ट हुए
- लगभग 100 आतंकियों को नष्ट किया, अलगाववादी FLA ने पीछे हटने का फैसला किया
- नाइजर, बुर्किना फासो और रूसी अफ्रीका कॉर्प्स की सहायता की दावे
बामाको में स्थित अनफ़िस बेस, जो किडाल और गाओ के बीच स्थित है, हाल ही में माली की सेना और अलगाववादी अज़वद मुक्तिकरण मोर्चा (FLA) तथा अल-कायदा के सहयोगी जिनिम (JNIM) के बीच घनिष्ठ लड़ाई का केंद्र बना। सेना ने घोषणा की कि उन्होंने इस रणनीतिक बेस तक पहुँच को फिर से स्थापित कर लिया है, जबकि विरोधी समूहों ने एक बड़े रिइनफ़ोर्समेंट काफिले पर हमला किया था।
पिछला पृष्ठभूमि
माली में दशकों से अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े उग्रवादी समूहों तथा उत्तर में अलगाववादी आंदोलन ने लगातार अस्थिरता पैदा की है। 2012 में शुरू हुए अलगाववादी संघर्ष ने किडाल जैसे क्षेत्रों को नियंत्रित कर लिया, जबकि गाओ जैसे प्रमुख शहर सरकार के नियंत्रण में रहे। 2020 के दशक में, जीनिम और FLA ने मिलकर बड़े पैमाने पर हमले किए, जिसमें रक्षा मंत्री जनरल सादियो कैमरा की हत्या भी शामिल थी।
हालिया घटनाक्रम
जुलाई 2026 के पहले सप्ताह में, FLA ने अनफ़िस के चारों ओर एक व्यापक घेराव स्थापित किया, जिससे सैन्य आपूर्ति रुक गई। लेकिन अगले दिन, सेना ने बताया कि उन्होंने 12 युद्ध वाहन नष्ट कर लगभग 100 आतंकियों को मार दिया। एयर स्ट्राइक और जमीन पर संचालन के संयोजन से बेस पर नियंत्रण फिर से हासिल किया गया। FLA के प्रवक्ता मोहम्मद एल्माउलूद रामदाने ने कहा कि “हमने बेहतर पुनर्गठन के लिए पीछे हटना चुना” और नाइजर व बुर्किना फासो की सेनाओं के समर्थन का उल्लेख किया।
अंतरराष्ट्रीय पहलू और संभावित प्रभाव
माली, नाइजर और बुर्किना फासो के सैन्य कूपों के बाद, पश्चिमी सहयोगियों से दूरी बनाते हुए रूसी समर्थन की ओर रुख किया है। रूसी अफ्रीका कॉर्प्स की भागीदारी को लेकर कई रिपोर्टें सामने आई हैं, लेकिन दोनों पक्षों ने स्वतंत्र पुष्टि नहीं की। इस संघर्ष के बढ़ते स्तर से क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघन, नागरिक हताहत और शरणार्थी प्रवाह में वृद्धि की आशंका है, जिससे पड़ोसी देशों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।
भविष्य की दिशा
अनफ़िस की स्थिति को लेकर अब तक की लड़ाई अस्थायी जीत का संकेत देती है, लेकिन दीर्घकालिक शांति के लिए व्यापक राजनीतिक समाधान आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मुद्दे को केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि राजनीतिक संवाद, विकास सहायता और स्थानीय समुदायों की सहभागिता के साथ देखना होगा।