28 वर्षीय बिहार के रोहित कुमार ने पोखरा में फेवा लेक में तैरते समय डूबकर अपनी जान गंवाई। घटना के बाद आपदा प्रबंधन दल ने तुरंत खोज शुरू की, लेकिन उपचार के बाद वह अस्पताल में ही क्वारंटीन में नहीं बच सका। अधिकारियों ने इस दुर्भाग्यपूर्ण डुबकी की पूरी जांच का आदेश दिया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- रोहित कुमार, 28, ने नेपाल के फेवा लेक में तैरते समय डूबकर मौत हो गई।
- घटना के बाद कास्की पुलिस और आपदा प्रबंधन टीम ने तुरंत खोज अभियान शुरू किया।
- रोगी को तुरंत पश्चिमी क्षेत्रीय अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उपचार के दौरान वह नहीं बच सके।
फेवा लेक, पोखरा के केंद्र में स्थित, एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जहाँ भारत सहित कई देशों के यात्रियों का प्रवाह रहता है। 11 जुलाई, 2026 को, बिहार के 28 वर्षीय युवा रोहित कुमार और उसके चार मित्र इस शांत जलाशय के किनारे स्थित ताल बाराही मंदिर की यात्रा के बाद तैराकी के लिए पानी में कूद पड़े।
घटना का विवरण
स्थानीय पुलिस के अनुसार, रोहित और उसके एक मित्र ने नाव से उतरकर जल में प्रवेश किया। अचानक रोहित को पानी में डूबते हुए देखा गया और वह तुरंत सतह पर नहीं आ सका। उसके मित्र ने मदद के लिए पुकारा, परन्तु तेज़ धारा और ठंडे पानी ने बचाव को कठिन बना दिया।
प्रतिक्रिया और बचाव प्रयास
कास्की जिला पुलिस ने आपदा प्रबंधन टीम को त्वरित कार्रवाई के लिए बुलाया। पेवॉ वॉच और रेस्क्यू टावर से तैनात अधिकारी, सहायक उप निरीक्षक देवेंद्र केसी के नेतृत्व में, एक समन्वित खोज अभियान शुरू किया। लगभग शाम 5 बजे, सशस्त्र पुलिस बल ने रोहित को जल से बाहर निकाल लिया, परन्तु वह अत्यधिक शोकग्रस्त स्थिति में था और तुरंत ही पश्चिमी क्षेत्रीय अस्पताल, पोखरा ले ले जाया गया।
पड़ताल और संभावित कारण
अधिकारियों ने बताया कि जल की तेज़ धारा, ठंडा तापमान और संभवतः रोहित की तैराकी कौशल की कमी ने इस दुर्घटना को जन्म दिया। वर्तमान में कास्की पुलिस इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है, जिसमें जल में मौजूद संभावित दुर्घटनात्मक कारकों की समीक्षा और स्थानीय सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता शामिल है।
भविष्य में सुरक्षा उपाय
यह घटना पर्यटन स्थलों में सुरक्षा मानकों की पुनः समीक्षा की आवश्यकता को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल निकायों के किनारे स्पष्ट चेतावनी संकेत, जीवन रक्षक उपकरणों की उपलब्धता और तैराकी के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग जैसी उपायों से भविष्य में इसी तरह की त्रासदी को रोका जा सकता है।