बाहरी सुरक्षा खतरे और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के संदेहपूर्ण रुख के बीच, नाटो के यूरोपीय सदस्य गठबंधन को सुदृढ़ करने और संयुक्त रक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अधिक सक्रिय भूमिका अपना रहे हैं। इस परिवर्तन का प्रभाव यूरोप और विश्व सुरक्षा पर गहरा पड़ता दिख रहा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ट्रम्प प्रशासन नाटो के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पर सवाल उठाता है।
- यूरोपीय सदस्य सुरक्षा खर्च बढ़ाकर गठबंधन की स्थिरता सुनिश्चित करना चाहते हैं।
- भविष्य में नाटो की रणनीति में यूरोप की आत्मनिर्भरता प्रमुख होगी।
नाटो (नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइज़ेशन) सात दशकों से पश्चिमी सुरक्षा की रीढ़ रहा है। 1949 में सोवियत विस्तार को रोकने के लिए स्थापित यह 32‑सदस्यीय गठबंधन आज भी यूरोपीय सुरक्षा के मूल सिद्धांत पर केंद्रित है, परंतु अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दो मुख्य रुखों ने इसे नई चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है।
ट्रम्प का नाटो‑संदेह और उसके परिणाम
ट्रम्प ने दोनों कार्यकालों में नाटो के मूल्य को लगातार प्रश्नांकित किया, इसे "अमेरिका के लिए बुरा सौदा" कहा और गठबंधन से बाहर निकलने की धमकी दी। उनका तर्क था कि यूरोपीय मित्र कम खर्च कर लाभ अधिक उठाते हैं, जबकि अमेरिकी योगदान अनुपातिक रूप से कम है। अप्रैल 2024 में, इरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी कार्रवाई पर यूरोपीय सहयोगियों ने उत्तर न दिया, जिससे ट्रम्प ने नाटो को "पेपर टाइगर" कहा। इस तरह के बयान न केवल गठबंधन के भीतर विश्वास को क्षीण करते हैं, बल्कि यूरोप को अपने रक्षा ढांचे को पुनः परिभाषित करने के लिए प्रेरित करते हैं।
यूरोप की प्रतिक्रिया: खर्च में वृद्धि और स्वायत्तता की तलाश
यूरोपीय देशों ने अपनी रक्षा बजट को 5 % जीडीपी तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें 3.5 % मुख्य सैन्य आवश्यकताओं और अतिरिक्त 1.5 % रणनीतिक बुनियादी ढांचे के लिए है। हालांकि, 2026 तक केवल पाँच सदस्य ही इस लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में अग्रसर हैं। इस बीच, संयुक्त राज्य ने यूक्रेन को समर्थन में कटौती की, जिससे यूरोप को वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप, फ्रांस, जर्मनी और स्कैंडिनेविया जैसे देशों ने सामरिक स्वायत्तता बढ़ाने के लिए नई रक्षा परियोजनाओं की घोषणा की है, जैसे कि यूरोपीय सामुदायिक रक्षा एजेंसी (EDCA) के तहत साझा क्षमताओं का विकास।
आंतरिक तनाव और रणनीतिक चुनौतियाँ
ट्रम्प की ग्रेनलैंड पर कब्जा करने की इच्छा और रूस के साथ संभावित समझौते की खोज ने नाटो के भीतर अतिरिक्त तनाव पैदा किया। 2025 में ट्रम्प द्वारा पुतिन से सीधे वार्ता करने का प्रयास भी यूरोपीय देशों को असहज कर गया, क्योंकि इससे गठबंधन की एकजुटता और सामूहिक रक्षा सिद्धांत (आर्टिकल 5) पर प्रश्न उठे। इन स्थितियों में यूरोपीय सदस्य अब दोधारी तलवार की तरह कार्य कर रहे हैं: एक ओर अमेरिकी समर्थन पर निर्भरता बनाए रखना, जबकि दूसरी ओर स्वायत्त रक्षा क्षमताओं को तेज़ी से विकसित करना।
भविष्य की दिशा: यूरोपीय नाटो का नया स्वरूप
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दशक में नाटो का केंद्र बिंदु अधिक यूरोपीय होगा। यह बदलाव न केवल वित्तीय भार के पुनर्वितरण को दर्शाता है, बल्कि रणनीतिक निर्णय‑निर्माण में यूरोप की आवाज़ को भी सशक्त बनाता है। यदि यूरोप अपनी रक्षा खर्च और तकनीकी निवेश को तेज़ी से बढ़ाता है, तो नाटो को एक बहुपक्षीय सुरक्षा मंच के रूप में पुनः स्थापित किया जा सकता है, जहाँ अमेरिका एक प्रमुख भागीदार रहेगा, परंतु अकेला स्तंभ नहीं रहेगा। इस प्रक्रिया में यूरोपीय संघ की सामूहिक रक्षा पहलें, जैसे यूरोपीय फास्ट ट्रैक डिफेन्स (EFTD), महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।