इज़राइल में 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित आम चुनाव का शेड्यूल तय हो गया है, जो 38 साल बाद पहली बार निर्धारित समय पर होगा। बेंजामिन नेतन्याहू के पुनरागमन या नई नेतृत्व की संभावना पर राजनीतिक परिदृश्य तीव्र हो रहा है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित मतदान
- 38 साल बाद पहला नियत‑समय चुनाव
- 53 साल में पहली बार पूरी कार्यकाल समाप्ति के बाद चुनाव
इज़राइल ने आधिकारिक तौर पर 27 अक्टूबर 2026 को अपने सामान्य चुनावों की तिथि तय कर ली है, जिससे 38 साल के अंतराल के बाद देश पहली बार निर्धारित समय पर मतदान करेगा। इस घोषणा के बाद चुनावी अभियान तेज़ी से शुरू हो गया है, क्योंकि सभी प्रमुख दल इस महत्त्वपूर्ण तिथि के लिए तैयार हो रहे हैं।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
इज़राइल की राजनीति में अक्सर गठबंधन टूटना, बहुमत खोना या अस्थायी सरकारों के कारण चुनाव जल्दबाज़ी से आयोजित किए जाते रहे हैं। 1973 के बाद से ऐसा कोई चुनाव नहीं हुआ था जहाँ पूरी सरकार अपना पूरा कार्यकाल समाप्त करके ही चुनाव के लिए आगे बढ़ी। यह 53 साल बाद पहली बार है जब कोई सरकार पूर्ण चार‑सालीय अवधि पूरा कर रही है, जिससे इस बार का चुनाव अधिक स्थिरता का संकेत देता है।
बेंजामिन नेतन्याहू की रणनीति
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि वह एक राष्ट्रीय एकता सरकार बनाना चाहते हैं, जो केवल एक विचारधारा पर निर्भर न हो। उनका चुनावी संदेश मुख्यतः सुरक्षा मुद्दों पर केन्द्रित रहेगा—विशेषकर ईरान, लेबनान के हिज़्बुल्ला और गाज़ा की स्थिति। उनका दावा है कि एक मजबूत रक्षा नीति ही इज़राइल के भविष्य को सुरक्षित रखेगी, और यह संदेश कई मतदाताओं के साथ गूँज रहा है।
परिणामों की संभावित प्रभाव
एक हालिया सर्वेक्षण में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और गादी आइज़ेनकोट की पार्टी को 120-सदस्यीय नेसेट में लगभग समान सीटों का अनुमान मिला—प्रत्येक को 23-23 सीटें। यह संकेत देता है कि चुनावी मुकाबला कठिन होगा और गठबंधन निर्माण की प्रक्रिया फिर से जटिल हो सकती है। यदि नेतन्याहू पुनः सत्ता में आते हैं, तो इज़राइल की सुरक्षा नीति में निरंतरता बनी रहेगी; वहीं नई गठबंधन सरकार का उदय क्षेत्रीय तनाव को कम करने और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को पुनर्स्थापित करने की संभावना रखता है।
इज़राइल की चुनावी प्रणाली
इज़राइल में नेसेट के 120 सीटों के लिए हर चार साल में आनुपातिक प्रतिनिधित्व (प्रोपोर्शनल रेप्रेजेंटेशन) प्रणाली के तहत चुनाव होते हैं। कोई भी पार्टी कम से कम 3.25% वोट हासिल करे तो उसे संसद में सीट मिलती है। इस प्रणाली के कारण छोटे दल भी सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जिससे गठबंधन राजनीति का महत्व और बढ़ जाता है।