अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नाकाबंदी फिर से लागू करने और सुरक्षित पारगमन के बदले 20% माल शुल्क लेने का एलान किया। इस कदम से इरान का कड़ा विरोध और तेल कीमतों में उछाल सामने आया।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ट्रम्प ने होर्मुज़ में नाकाबंदी फिर से लागू की।
- 20% शुल्क प्रस्तावित, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों में विवाद।
- इ्रान ने विरोध जताया, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा।
संयुक्त राज्य अमेरिका ने 14 जुलाई को आधिकारिक तौर पर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नाकाबंदी फिर से लागू करने का एशिया‑पैसिफिक क्षेत्र में घोषणा की। यह कदम अप्रैल में लागू किए गए नाकाबंदी को उलटने वाले मध्यस्थ शांति समझौते के बाद आया, जहाँ दोनों पक्षों ने जलडमरूमध्य को बिना शुल्क के पूरी तरह खोलने का वादा किया था। ट्रम्प ने सामाजिक मीडिया पर कहा, "हम इरानी नाकाबंदी को पुनः स्थापित कर रहे हैं और सभी देशों को सुरक्षित उपयोग की गारंटी देंगे, लेकिन इसके बदले 20% माल शुल्क वसूलेंगे।"
नया शुल्क प्रस्ताव और इसके औपचारिक विवरण
ट्रम्प की घोषणा में कहा गया कि अमेरिकी नौसेना एकत्रित सुरक्षा सेवाओं के लिए शिपिंग कंपनियों से माल की कुल कीमत का 20% वसूल करेगी। यह शुल्क न केवल आर्थिक बोझ बढ़ाएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के सिद्धांतों—विशेषकर मुक्त नेविगेशन के अधिकार—को चुनौती देगा। अमेरिकी सैन्य ने अगले मंगलवार को दोपहर 4 बजे ईडीटी पर इरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी फिर से शुरू करने की पुष्टि की।
इ्रान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय तनाव
इ्रान ने तत्काल कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि वह किसी भी अमेरिकी हस्तक्षेप का प्रतिरोध करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्बास अराघची ने ट्रम्प के बयान का मज़ाक उड़ाते हुए कहा, "इ्रान हमेशा से जलडमरूमध्य का संरक्षक रहा है और रहेगा; 20% शुल्क बहुत अधिक है, लेकिन हम उचित मूल्य पर ही समझौता करेंगे।" इरान ने कहा कि वह अंतरिम शांति समझौते के तहत जलडमरूमध्य के ट्रैफ़िक को नियंत्रित करने और संभावित शुल्क वसूलने का अधिकार रखता है, जबकि अमेरिकी पक्ष इसे अस्वीकार करता है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) और वैश्विक मानदंड
संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन ने अभी तक ट्रम्प के प्रस्ताव पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन यह स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में अनिवार्य टोल लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है। इस प्रकार, यदि अमेरिकी नीति लागू होती है तो यह मौजूदा अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के साथ टकराव में आ सकती है, जिससे वैश्विक शिपिंग उद्योग में अनिश्चितता बढ़ेगी।
बाजार पर असर और आगे की संभावनाएँ
खबर के बाद बेंट कच्चे तेल की कीमत में 7.8% की तेज़ी आई, जिससे प्रति बैरल $81.92 तक पहुँच गया। हालांकि यह कीमत युद्ध के चरम समय के $120 से कम है, फिर भी तेल, खाद्यान्न और अन्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का जोखिम बढ़ गया है। क्षेत्र में अमेरिकी और इरानी सैन्य कार्रवाइयों के बीच लगातार टकराव जारी है, जिसमें ओमान के तट के पास अमेरिकी ड्रोन शिप का उपयोग, बहरैन में मिसाइल अलर्ट, तथा कुवैत और जॉर्डन की सीमाओं पर इरानी हमलों की रिपोर्ट शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नाकाबंदी और शुल्क की नीति जारी रहती है, तो मध्य पूर्व में आर्थिक अस्थिरता और संभावित सैन्य संघर्ष का जोखिम बढ़ेगा।