अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए दूसरे दौर के सटीक हमलों के बाद तेहरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन सहित खाड़ी देशों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की है। इस ताजा सैन्य टकराव ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने का खतरा पैदा कर दिया है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमलों को रोकने के लिए ईरान पर दूसरे दिन भी हवाई हमले जारी रखे।
- जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और ओमान में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया।
- होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका से वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मच गया और कच्चे तेल की कीमतों में 4.5% का उछाल आया।
रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक संघर्ष का केंद्र बन गया है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण सैन्य हमलों ने मध्य पूर्व में एक बड़े युद्ध की आशंका को जन्म दे दिया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को पंगु बनाने के लिए लगातार दूसरे दिन हमले किए, जिसके बाद ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों और खाड़ी देशों पर मिसाइल दागकर जवाबी कार्रवाई की है।
अमेरिकी हमले और ईरान की सैन्य क्षमता को नुकसान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों, युद्धपोतों और ड्रोनों ने ईरान के दर्जनों ठिकानों पर सटीक हमले किए हैं। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को नष्ट करना है जिसके जरिए वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाता रहा है। ईरानी मीडिया के अनुसार, इन हमलों में केश्म द्वीप (Qeshm Island), बंदर अब्बास और इराक सीमा से सटे खुज़ेस्तान प्रांत को निशाना बनाया गया, जिसमें जान-माल का नुकसान हुआ है।
ईरान का पलटवार: खाड़ी देशों पर मिसाइल हमले
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान के शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की घोषणा की। जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसने अपनी सीमा में प्रवेश करने वाली चार ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक मार गिराया है। वहीं, कुवैत की सेना ने भी हवाई खतरों को रोकने के लिए अपनी रक्षा प्रणालियों को सक्रिय किया। यहां तक कि पारंपरिक रूप से तटस्थ रहने वाले ओमान को भी ईरान की इस आक्रामकता का सामना करना पड़ा, जिसके बाद ओमान ने ईरानी राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
वैश्विक तेल बाजार पर संकट और आर्थिक प्रभाव
इस सैन्य टकराव का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को 'अनिश्चित काल के लिए बंद' घोषित किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। एशिया में वायदा कारोबार शुरू होते ही अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 4.5% बढ़कर 74 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया। ईरान के सर्वोच्च नेता के एक सलाहकार ने स्पष्ट किया कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण ईरान के लिए "दर्जनों परमाणु बमों से अधिक महत्वपूर्ण" है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने की ईरान की रणनीति को दर्शाता है।
शांति समझौते का अंत और कूटनीतिक विफलता
यह ताजा संघर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा पिछले युद्धविराम समझौते को समाप्त घोषित करने के बाद शुरू हुआ है। पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ देशों ने इस बढ़ते क्षेत्रीय तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिकी हमलों ने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के सभी राजनयिक प्रयासों को विफल कर दिया है। इस टकराव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य पूर्व में एक स्थायी शांति समझौता फिलहाल कोसों दूर है और आने वाले दिनों में यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक प्रभावित कर सकता है।