ब्रिटेन सरकार ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित करने और इस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है। यह कदम देश में बढ़ते यहूदी विरोधी हमलों और खुफिया साजिशों के बाद उठाया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- ब्रिटेन सरकार ईरान के सैन्य बल IRGC को औपचारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित करने जा रही है।
- यह निर्णय ब्रिटेन की धरती पर यहूदी विरोधी हमलों और ईरानी असंतुष्टों के खिलाफ खुफिया साजिशों में वृद्धि के बाद लिया गया है।
- उत्तरी लंदन में यहूदी एम्बुलेंसों को जलाने वाले एक कट्टरपंथी समूह पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा।
यूनाइटेड किंगडम (UK) ईरान के विशिष्ट सैन्य बल, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकवादी संगठन घोषित करने की अंतिम तैयारी कर रहा है। यह बड़ा रणनीतिक कदम ब्रिटिश धरती पर यहूदी विरोधी (antisemitic) घटनाओं में आई भारी तेजी और विभिन्न खुफिया साजिशों के बाद उठाया जा रहा है। ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों ने लंबे समय से आईआरजीसी की गतिविधियों पर चिंता जताई है और अब इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का मन बना लिया है।
ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, आईआरजीसी और उसके सहयोगी समूहों का हाथ ब्रिटेन में रहने वाले ईरानी असंतुष्टों, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने वाली हत्या की कोशिशों और बमबारी की साजिशों में पाया गया है। इसके अतिरिक्त, ब्रिटिश सरकार उस कट्टरपंथी इस्लामी समूह पर भी प्रतिबंध लगाने जा रही है जिसने उत्तरी लंदन में यहूदी समुदाय की चार एम्बुलेंसों को आग लगाने और इजरायली दूतावास सहित यहूदी-संबद्ध स्थलों पर हमलों की साजिश रचने की जिम्मेदारी ली थी।
आईआरजीसी का इतिहास और प्रभाव
वर्ष 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान के धार्मिक शासन की रक्षा के लिए गठित किया गया आईआरजीसी आज ईरान की सबसे शक्तिशाली सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक शक्ति बन चुका है। यह बल ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को नियंत्रित करता है और इसकी विशिष्ट शाखा कुद्स फोर्स (Quds Force) मध्य पूर्व में हिजबुल्लाह और हमास जैसे समूहों को वित्तीय और सैन्य सहायता प्रदान करती है। अमेरिका ने 2019 में ही इसे विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था, और अब ब्रिटेन का यह कदम यूरोपीय देशों के रुख में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है।
कानूनी और राजनयिक प्रभाव
ब्रिटेन के आतंकवाद अधिनियम 2000 के तहत आईआरजीसी को प्रतिबंधित करने के बाद, इस समूह का सदस्य होना, इसकी बैठकों में शामिल होना या इसके प्रतीकों का सार्वजनिक प्रदर्शन करना एक गंभीर आपराधिक अपराध बन जाएगा। इसके अलावा, सरकार इसकी संपत्तियों को जब्त कर सकेगी। विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले से लंदन और तेहरान के बीच राजनयिक संबंध पूरी तरह से ठंडे बस्ते में चले जाएंगे, जिससे फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ सकता है।