मुंबई में एक आवासीय इमारत में खेलते समय 12 वर्षीय बच्चे की लिफ्ट के शाफ्ट में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। सीसीटीवी में कैद हुई इस घटना ने महानगरों में लिफ्ट सुरक्षा मानकों और रखरखाव की गंभीर कमियों को उजागर किया है।

मुंबई से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां एक बहुमंजिला आवासीय इमारत में दोस्तों के साथ खेलते समय 12 वर्षीय एक मासूम बच्चे की लिफ्ट के खुले शाफ्ट में गिरने से मौत हो गई। गिरने के कारण बच्चे के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। स्थानीय पुलिस ने इस संबंध में दुर्घटनावश मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज कर ली है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है।

सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई लापरवाही

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी घटना इमारत में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में कैद हो गई है। पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम अब इस फुटेज की बारीकी से जांच कर रही है। शुरुआती जांच और फुटेज से पता चलता है कि बच्चे कॉरिडोर में खेल रहे थे। इसी दौरान, लिफ्ट का दरवाजा (जो केबिन के दूसरे फ्लोर पर होने के कारण बंद रहना चाहिए था) आसानी से खुल गया और बच्चा सीधे नीचे गिर गया। यह तकनीकी खराबी सीधे तौर पर लिफ्ट के रखरखाव में भारी लापरवाही की ओर इशारा करती है।

शहरी बुनियादी ढांचे और सुरक्षा की अनदेखी

यह दुखद घटना मुंबई जैसे तेजी से विकसित हो रहे महानगरों में लिफ्ट से संबंधित हादसों की बढ़ती और चिंताजनक प्रवृत्ति को रेखांकित करती है। मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहरों में बहुमंजिला इमारतें पूरी तरह से लिफ्ट पर निर्भर हैं, लेकिन सुरक्षा ऑडिट की अक्सर अनदेखी की जाती है। 'महाराष्ट्र लिफ्ट, एस्केलेटर और मूविंग वॉक अधिनियम' के तहत, हाउसिंग सोसायटियों के लिए नियमित रूप से फिटनेस जांच कराना और प्रमाणित निरीक्षकों से प्रमाण पत्र प्राप्त करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर इन नियमों का कड़ाई से पालन नहीं होता है, जिससे मासूम बच्चों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

कानूनी और प्रशासनिक जवाबदेही

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जानलेवा लापरवाही के मामलों में हाउसिंग सोसाइटी की प्रबंधन समिति और लिफ्ट रखरखाव करने वाली एजेंसी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 (लापरवाही के कारण मौत) के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया जा सकता है। पुलिस वर्तमान में लिफ्ट के रखरखाव के लिए जिम्मेदार एजेंसी के अधिकारियों से पूछताछ कर रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने स्थानीय नगर निकायों से मांग की है कि लिफ्ट सुरक्षा और उनके वार्षिक रखरखाव अनुबंधों (AMC) की निगरानी के लिए एक पारदर्शी और डिजिटल प्रणाली विकसित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह त्रासदी देश भर की हाउसिंग सोसायटियों के लिए एक कड़ा सबक है। सोसायटियों को केवल बाहरी साज-सज्जा पर ध्यान देने के बजाय बुनियादी सुरक्षा बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देनी चाहिए। लिफ्ट में चाइल्ड-सेफ्टी लॉक सुनिश्चित करना, नियमित मॉक ड्रिल और किसी भी तकनीकी खराबी पर तत्काल कार्रवाई करना कोई वैकल्पिक विकल्प नहीं बल्कि जीवन रक्षक जरूरतें हैं।