सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने जम्मू‑कश्मीर के पूँछ‑राजौरी क्षेत्र में सीमा के साथ स्थित अग्रिम ठिकानों का दौरा किया। उन्होंने सुरक्षा माहौल, अतिप्रवेश नियंत्रण जाल और सैनिकों की तैनाती की तत्परता का मूल्यांकन किया, साथ ही अमरनाथ यात्रा की बढ़ी हुई सुरक्षा को भी ध्यान में रखा।
जनरल धीरज सेठ, भारत के प्रमुख सेना कमांडर, ने पुंछ‑राजौरी की दोहरी सीमा जिलों में लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के साथ स्थित अग्रिम पोस्टों का निरीक्षण किया। यह उनका पहला आधिकारिक दौरा है, जो उन्होंने पदभार संभालने के बाद किया, और यह यात्रा अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के व्यापक उपायों के बीच हुई।
पृष्ठभूमि और रणनीतिक महत्व
पुंछ‑राजौरी बेल्ट भारतीय सेना के लिए अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र है, जहाँ शत्रु अति-प्रवेश (infiltration) की संभावनाएँ लगातार बनी रहती हैं। इतिहास में इस खींचाव के कारण कई बार सीमापार बंधक और हथियारों की तस्करी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में भारत‑पाकिस्तान सीमा पर तनाव में उठाव ने इस क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को निरंतर अपडेट करने की आवश्यकता को बढ़ा दिया है।
यात्रा का विस्तृत विवरण
जनरल सेठ ने पहले व्हाइट नाइट कॉर्प्स के मुख्यालय (Nagrota) का दौरा किया, जहाँ वरिष्ठ कमांडरों ने उन्हें वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य, ऑपरेशनल तैनाती और निगरानी नेटवर्क के बारे में विस्तृत ब्रीफ़िंग दी। इसके बाद, उन्होंने 16 Corps के कमांडर और 25वीं डिवीजन के GOC सहित कई उच्च‑पदस्थ अधिकारियों के साथ आगे बढ़ते हुए पूंछ जिले के अग्रिम ठिकानों का निरीक्षण किया।
सुरक्षा परिप्रेक्ष्य और तत्परता
दौरे के दौरान, जनरल सेठ ने काउंटर‑इन्फिल्ट्रेशन ग्रिड की कार्यशीलता की जाँच की और सैनिकों की कॉम्बैट रेडीनेस पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने अग्रिम पोस्टों पर तैनात जवानों के साथ बातचीत कर उनके मनोबल को बढ़ाया, जिससे मोर्चे पर कर्तव्य भावना को सुदृढ़ किया गया। इस दौरे से स्पष्ट हुआ कि भारतीय सेना ने हाई‑टेक सेंसर, ड्रोनों और इलेक्ट्रॉनिक जामिंग उपकरणों को समेकित करके सीमा सुरक्षा को एक बहु‑स्तरीय प्रणाली में बदल दिया है।
अमरनाथ यात्रा के संदर्भ में सुरक्षा उपाय
समकालीन यात्रा‑सुरक्षा माहौल को देखते हुए, जनरल सेठ ने विशेष रूप से अमरनाथ यत्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि सीमापार संभावित खतरों को देखते हुए, सभी सुरक्षा एजेंसियों को सटीक समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता सुनिश्चित करनी होगी। इस दिशा में, सेना ने अतिरिक्त रक्षात्मक बटालियन, मेडिकल सपोर्ट यूनिट और एंटी‑टेरर इकाइयों को तैनात कर दिया है।
इस व्यापक दौरे के साथ, भारतीय सेना ने यह संदेश दिया कि वह न केवल वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है, बल्कि भविष्य में किसी भी उभरते खतरे के प्रति सतर्क और सक्रिय भी है।