एक 69 साल के बुजुर्ग ने तीन दशकों तक भारत के प्रमुख लक्ज़री होटलों को धोखा दिया, मुफ्त में रहकर महंगे सामान लेकर भाग गया। पुलिस ने अंततः उसे गिरफ्तार किया, लेकिन इस केस ने होटल सुरक्षा और पहचान‑परीक्षण की कमियों को उजागर किया।

राज्य के विभिन्न कोनों में लक्ज़री होटलों के प्रबंधन को अक्सर अतिथि‑संतुष्टि पर अधिक ध्यान देना पड़ता है, जिससे पहचान‑परीक्षण में छूट रह जाती है। इस पृष्ठभूमि में थूथुकुड़ी, तमिलनाडु के मूल निवासी विन्सेंट जॉन ने 30 सालों तक 300 से अधिक पाँच‑स्टार होटलों को निशाना बनाया।

धोखाधड़ी की रणनीति

जॉन ने 1980 के दशक में दिल्ली में एक टूर गाइड के रूप में काम शुरू किया, जिससे उसे कई होटल में मुफ्त ठहराव की सुविधा मिली। वह अक्सर खुद को अंग्रेजी शिक्षक, योग प्रशिक्षक या इवेंट आयोजक के रूप में प्रस्तुत करता, दो बैग लेकर चेक‑इन करता – एक में व्यक्तिगत सामान, दूसरा में अखबार या तकिये जैसे दिखावटी वस्तुएँ। होटल स्टाफ को अपने सामान खुद ले जाने से रोककर वह अपना कर्तव्य निभाता, जबकि असली मूल्यवान सामान (लैपटॉप, महँगा शराब, सिगरेट) को चुपके से निकाल लेता।

कई राज्यों में समान केस

रायपुर पुलिस ने जॉन को 2026 में गिरफ्तार किया, लेकिन उसके खिलाफ बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, झारखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, दिल्ली और चहत्तीसगढ़ में कई केस दर्ज थे। दिल्ली पुलिस ने 1996 में उसे पहली बार गिरफ्तार किया था, और 2016 में न्यू दिल्ली के क्राउन प्लाज़ा होटल में भी वही पैटर्न देखा गया था।

होटल सुरक्षा की कमजोरियाँ

जॉन की चालें इस बात को रेखांकित करती हैं कि भारतीय लक्ज़री होटल उद्योग में पहचान‑परीक्षण की प्रक्रिया अभी भी पुरानी है। कई होटल छोटे‑मोटे नुकसान को लेकर पुलिस शिकायत करने से कतराते हैं, fearing कि इससे उनका प्रतिष्ठा धूमिल हो सकता है। इस कारण, जॉन जैसी चालें अक्सर बिना रिपोर्ट के ही रह जाती थीं।

पुलिस की प्रतिक्रिया और भविष्य की दिशा

जांच में पाया गया कि जॉन ने कभी भी अपना आधार कार्ड नहीं दिखाया; शुरुआती चरण में वह वास्तविक दस्तावेज़ प्रस्तुत करता, पर बाद में उसे जब पुलिस ने जब्त कर लिया तो वह फोटोकॉपी का उपयोग करने लगा। पुलिस ने बताया कि वह उम्र का फायदा उठाकर कम सतर्कता वाले कर्मचारियों को फँसाता। अब कई प्रमुख होटल श्रृंखलाओं ने बायो‑मेट्रिक या दो‑स्तरीय पहचान प्रणाली अपनाने की घोषणा की है।

जॉन ने अपने गिरफ्तारी के बाद कहा कि वह अपने 10 एकड़ ancestral जमीन को बेचकर गोवा में वृद्धाश्रम में रहना चाहता है। यह बयान कई पुलिस अधिकारियों को संदेहास्पद लगा, क्योंकि वह पहले भी समान वादे कर चुका था।