दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है, जो 2021 के बाद सबसे देरी से हुआ है। हालांकि जून की कमी के बावजूद, जुलाई की बारिश ने मानसून को सामान्य स्थिति में ला दिया है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने पुष्टि की है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब आधिकारिक तौर पर पूरे देश को कवर कर चुका है। गुरुवार, 9 जुलाई तक मानसून ने राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तरी अरब सागर के शेष हिस्सों में प्रवेश कर लिया है, जिससे देश के कोने-कोने में वर्षा का चक्र सक्रिय हो गया है।
2021 के बाद सबसे बड़ी देरी
विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष मानसून की प्रगति पिछले कुछ वर्षों की तुलना में काफी धीमी रही है। यदि हम पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2025 में मानसून 29 जून को ही पूरे देश में फैल गया था, जबकि 2022 से 2024 के बीच यह जुलाई के शुरुआती दिनों (2 जुलाई) में ही अपना लक्ष्य प्राप्त कर चुका था। इस वर्ष, मानसून ने 9 जुलाई को पूर्ण कवरेज प्राप्त किया, जो कि सामान्य तिथि से एक दिन की देरी है, लेकिन 2021 के बाद से यह सबसे धीमा आगमन है जब पूर्ण कवरेज 12 जुलाई को हुआ था।
जून की कमी और जुलाई का सुधार
इस मानसून सत्र की शुरुआत काफी अनिश्चित रही। जून के महीने में देश भर में भारी वर्षा की कमी देखी गई थी, जहाँ अखिल भारतीय स्तर पर वर्षा में 40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, जुलाई की शुरुआत के साथ ही मौसम का मिजाज बदला है। निरंतर हो रही भारी बारिश ने जून के दौरान हुए घाटे की भरपाई करना शुरू कर दिया है।
वर्तमान स्थिति और आगामी पूर्वानुमान
8 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, देश में अब तक सामान्य वर्षा प्राप्त हुई है। मात्रात्मक रूप से, देश में 195.5 मिमी या 15 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है, जिसे मौसम विज्ञानियों द्वारा 'सामान्य' श्रेणी में रखा गया है। वर्तमान में केवल लगभग 25 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र ही वर्षा की कमी का सामना कर रहे हैं। IMD ने अगले दो दिनों के लिए दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।