लखनऊ में पुलिस ने आयोध्या के तीन आरोपी के घरों की तलाशी में लगभग 1.5 लाख रुपए नकद, सोने के गहने और एक कार बरामद की। साथ ही आरोपी के रिश्तेदारों के 15 बैंक खातों को फ्रीज कर धन के स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

लखनऊ: राष्ट्रीय राजधानी के पास स्थित आयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिये दान के रूप में जमा की गई धनराशि की चोरी के मामले में पुलिस ने आज तीन संदिग्धों के निवास स्थलों में विस्तृत तलाशी की। इस कार्रवाई के दौरान लगभग 1.5 लाख रुपये नकद, सोने के गहने (कान के झुमके और पेंडेंट सहित) और एक कार बरामद की गई।

तलाशी का विस्तृत विवरण

पुलिस ने पहले अनुकल्प मिश्रा को सुबह 9 बजे उनके घर ले जाकर 20 मिनट की तलाशी ली। उसके बाद लवकुश मिश्रा और करुणेश पाण्डेय के घरों में भी समान प्रक्रिया अपनाई गई। सभी तीनों के परिवार के सदस्यों से पूछताछ की गई और बरामद की गई वस्तुओं की सूची तैयार की गई। हालांकि पुलिस ने कुल नकद राशि का सटीक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन स्रोतों के अनुसार यह लगभग 1.5 लाख रुपये है।

बैंक खातों की जाँच

जांच के दौरान यह पता चला कि कई रिश्तेदारों के बैंक खातों में ऐसी लेन‑देनों का सिलसिला था, जो उनके ज्ञात आय स्रोतों से असंगत था। इस कारण पुलिस ने 15 खातों को फ्रीज कर दिया है और अब इन खातों की जांच कर चोरी हुए धन की मौलिकता स्थापित करने की कोशिश कर रही है।

आरोपियों के बयान

अनुकल्प मिश्रा ने कहा कि वह और सहयोगी अविनाश ने चोरी हुई धनराशि को शेयर बाजार में निवेश किया, लोगों को ब्याज पर ऋण दिया और फिर उन धन को रिश्तेदारों एवं करीबी परिचितों के माध्यम से वापस अपने खातों में जमा कराया। यह बयान अभी पुलिस द्वारा सत्यापित किया जा रहा है।

विस्तृत जांच और संभावित प्रभाव

अब तक इस दान चोरी मामले में आठ आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। जांच एजेंसी वित्तीय अभिलेखों, बैंक लेन‑देनों, निवेश दस्तावेज़ों और संपत्ति के स्वामित्व की गहरी जाँच कर रही है। यदि आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो यह न केवल राम मंदिर निर्माण के लिये दान की विश्वसनीयता को ठेस पहुँचाएगा, बल्कि धार्मिक दान प्रणाली में पारदर्शिता की माँग को भी तेज़ करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की बड़ी आर्थिक धोखाधड़ी का सामाजिक प्रभाव व्यापक हो सकता है, क्योंकि यह जनता के विश्वास को नुकसान पहुंचाता है और भविष्य में दान देने की इच्छा को कम कर सकता है। सरकार को इस मामले में कड़ी सज़ा और साथ ही दान प्रक्रिया को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाने की जरूरत है।