दिल्ली‑एनसीआर में अनधिकृत इमारतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम को ‘सिर्फ दिखावे के उपाय’ करने का आरोप लगाया। कोर्ट ने दो आईआईटी प्रोफेसरों, दो ड्राफ्ट्समैन और एमसीडी अधिकारियों की टीम बनाकर विस्तृत सर्वेक्षण का आदेश दिया।

नई दिल्ली – 9 जुलाई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली‑एनसीआर में निरंतर बढ़ते अवैध निर्माणों को लेकर नगर निगम (MCD) को कड़ी फटकारते हुए कहा कि केवल ‘चेहरा बचाने वाले’ उपाय ही किए जा रहे हैं। यह टिप्पणी जस्टिस ए. अमनुल्ला और जस्टिस आर. महादेवन की पैनल ने दी, जो कि एक महीने पहले 25 मार्च को इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान जारी किए गए नोटिस का अनुसरण कर रही थी।

पृष्ठभूमि और पूर्व घटनाएँ

दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों में कई बार इमारतों के ढहने और आग लगने की घटनाएँ हुई हैं, जिनमें 30 मई को सैदुलाजाब में ढहने वाली इमारत में छह मौतें और 14 घायल हुए। इसी के साथ 3 जून को मालवीय नगर में और 22 जून को लखनऊ में हुई आग दुर्घटनाएँ भी इस बात का संकेत देती हैं कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम बात बन गई है। इन घटनाओं के बाद कोर्ट ने 2024 और मई 2026 के निर्देशों के बावजूद नगर निगम के अनुपालन को लेकर गंभीर चिंता जताई।

कोर्ट की प्रमुख निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि कई निर्माण ‘स्पष्ट उल्लंघन’ के साथ, नियामक मानदंडों, प्रतिबंधित क्षेत्रों में और अनुमोदित उपयोग से अलग उद्देश्यों के लिए किए जा रहे हैं। यह न केवल सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि शहरी नियोजन की वैधता को भी चुनौती देता है। कोर्ट ने सभी नगर निगमों को निर्देश दिया कि वे अपने अधिकार क्षेत्रों में ‘आवासीय उपयोग के लिये निर्धारित क्षेत्रों’ की पूरी जांच करें और जहाँ गैर‑आवासीय उपयोग हो रहा है, उसे तुरंत रोकें।

नए आदेश और कार्यकारी टीम

निर्णय में दो वरिष्ठ आईआईटी प्रोफेसरों और दो ड्राफ्ट्समैन को MCD के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष टीम बनाकर साकेत, लाजपत नगर, मालवीय नगर में अनधिकृत निर्माणों की वास्तविक सीमा का आकलन करने का आदेश दिया गया। यह टीम 4 अगस्त को कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी, और रिपोर्ट में ‘ईमानदार और विस्तृत जानकारी’ देने पर कोई ढील नहीं दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को भी 4 अगस्त को समक्ष उपस्थित होकर अग्नि सुरक्षा ऑडिट की स्थिति पर अपडेट देना होगा।

भविष्य के संभावित प्रभाव

यदि नगर निगम इस दिशा‑निर्देशों का पालन नहीं करता, तो कोर्ट ने ‘अवमानना’ के मुकदमे दायर करने की चेतावनी दी है। यह कदम न केवल स्थानीय प्रशासन को जवाबदेह बनाएगा, बल्कि अन्य राज्यों के शहरी प्राधिकरणों के लिये भी एक मिसाल स्थापित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कड़ी निगरानी से दीर्घकालिक में शहर की बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा और नियोजन में सुधार आएगा।