राजस्थान के झुंझुनूं में भारतीय वायुसेना के 22 वर्षीय जवान आर्यन झाझड़िया के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने पर पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। सैन्य सम्मान के साथ वीर जवान को अंतिम विदाई दी गई।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के पीपल का बास गांव में बुधवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी की आंखों को नम कर दिया। भारतीय वायुसेना के 22 वर्षीय जांबाज जवान, आर्यन झाझड़िया, जो देश की सेवा का संकल्प लेकर निकले थे, आज तिरंगे में लिपटे हुए अपने घर लौटे। उनके पार्थिव शरीर को देखते ही उनकी मां सरोज देवी की चीखें निकल गईं और बहनों का विलाप सुनकर पूरा गांव गमगीन हो गया।
एक अधूरा सपना और देश के प्रति समर्पण
आर्यन का जीवन बेहद प्रेरणादायक लेकिन दुखद रहा। 14 जुलाई 2004 को जन्मे आर्यन ने फरवरी 2024 में भारतीय वायुसेना में शामिल होकर अपने सपनों को पंख दिए थे। उनकी पहली पोस्टिंग कर्नाटक के बेलगाम में हुई थी, जिसके बाद अप्रैल 2026 में उनका तबादला चेन्नई के अवाड़ी एयरफोर्स स्टेशन पर किया गया। दुर्भाग्यवश, 5 जुलाई को ड्यूटी के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे ने इस युवा योद्धा को हमसे छीन लिया। जिस बेटे को मां ने गर्व के साथ वर्दी पहनाकर विदा किया था, उसे अंतिम बार इस रूप में देखना किसी भी माता-पिता के लिए असहनीय था।
गांव ने दी वीर सपूत को अंतिम सलामी
आर्यन की अंतिम यात्रा मंडावा से गांव तक एक भव्य तिरंगा यात्रा के रूप में निकाली गई। सड़क के दोनों ओर हजारों की संख्या में ग्रामीण खड़े थे, जो अपने गांव के लाडले को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। गांव की गलियों में केवल एक ही गूंज थी—'भारत माता की जय, आर्यन अमर रहें'। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जिनमें विधायक रीटा चौधरी और अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे, ने भी पुष्पचक्र अर्पित कर इस वीर जवान के बलिदान को नमन किया।
सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
श्मशान घाट पर भारतीय वायुसेना की एक विशेष टुकड़ी ने मौजूद रहकर 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया। सैन्य परंपराओं के अनुसार, पूरे राजकीय सम्मान के साथ आर्यन का अंतिम संस्कार किया गया। 22 वर्ष की आयु, जहाँ युवा अपने भविष्य की योजनाएं बनाते हैं, वहां आर्यन ने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनका बलिदान राजस्थान की इस वीर भूमि पर हमेशा स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।