सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सभी अधिकारियों को ऑपरेशन सिंधूर 2.0 व ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2.0 की तत्परता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने व्यावहारिक समाधान, नैतिक मानदंड और समग्र तैयारियों पर ज़ोर दिया, साथ ही 2047 तक विकसित भारत की दृष्टि में सेना की भूमिका को रेखांकित किया।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • ऑपरेशन सिंधूर 2.0 व स्नो लेपर्ड 2.0 की तत्परता के लिए स्पॉट रिव्यू अनिवार्य
  • सभी स्तरों पर व्यावहारिक, लागू‑योग्य समाधान अपनाने की आवश्यकता
  • सेना का दायरा सीमाओं से परे, 2047 तक ‘विकसित भारत’ में योगदान

जनरल धीरज सेठ ने 6 जुलाई 2026 को “साथ मिलकर उत्कृष्टता की ओर” शीर्षक से एक आधिकारिक पत्र जारी किया। पत्र में उन्होंने कहा कि युद्ध‑तैयारी उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी अधिकारियों को ऑपरेशन सिंधूर 2.0 एवं ऑपरेशन स्नो लेपर्ड 2.0 की तैयारी में संपूर्ण सतर्कता बरतनी चाहिए।

स्पॉट रिव्यू और समग्र तत्परता

सेना प्रमुख ने “स्पॉट रिव्यू” के माध्यम से वास्तविक समय में उपकरण, गोला‑बारूद, पोषण, मानव संसाधन और लॉजिस्टिक क्षमताओं की जाँच करने का आदेश दिया। यह दृष्टिकोण केवल तकनीकी क्षमताओं तक सीमित नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक और सामाजिक तत्परता को भी सम्मिलित करता है।

व्यावहारिकता और नवाचार

जनरल सेठ ने अधिकारियों को “बॉक्स के बाहर सोचें” और “सरल, लागू‑योग्य समाधान” तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि छोटे‑छोटे सुधार सामूहिक रूप से बड़ी रणनीतिक लाभ प्रदान कर सकते हैं, जबकि सिद्ध युद्ध‑प्रक्रियाएँ अभी भी महत्वपूर्ण हैं। इस संदर्भ में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और अनमैन्ड सिस्टम को मुख्यधारा में लाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

विकसित भारत में सेना की भूमिका

पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि भारतीय सेना का दायरा केवल सीमा रक्षा तक सीमित नहीं है; वह 2047 तक “विकसित भारत” के राष्ट्रीय लक्ष्य में प्रत्यक्ष योगदान देती है। इसके लिये पेशेवर दक्षता के साथ‑साथ बौद्धिक विकास, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भी आवश्यकता है।

आचार‑संहिता और डिजिटल सुरक्षा

सेना प्रमुख ने अधिकारियों को शारीरिक फिटनेस, व्यक्तिगत उदाहरण और सैनिकों के साथ कठिनाइयों को साझा करने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया को “ग्रे‑ज़ोन” युद्धक्षेत्र के रूप में पहचाना और ऑनलाइन सतर्कता की चेतावनी दी। अंत में, वेतनभोगी सैनिकों के प्रति सहानुभूति और नैतिक मानकों को बनाए रखने की पुनः पुष्टि की।