राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मेरठ में दलीत महिला के हत्याकांड की न्याय मांगते हुए हुए शांति पूर्ण प्रदर्शन पर पुलिस द्वारा लाठी चार्ज को ‘अनियंत्रित और क्रूर’ बताकर यूपी के डीजीपी और गृह सचिव को नोटिस भेजा। कई विरोधक गंभीर चोटों से पीड़ित हुए।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- NHRC ने यूपी के डीजीपी और गृह सचिव को 15 दिनों में कार्रवाई रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।
- शिकायत में कहा गया कि पुलिस ने बिना कारण लाठी चार्ज कर कई रुकवाए गए प्रदर्शनकारियों को यातनात्मक दुर्व्यवहार किया।
- विवादित वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को हिरासत में लिये हुए नागरिकों को पीटते दिखाया गया, जिससे मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगा।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 10 जुलाई, 2026 को उत्तर प्रदेश के डाइरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (डीजीपी) तथा राज्य गृह सचिव को एक औपचारिक नोटिस जारी किया। यह नोटिस मेरठ में 8 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा ‘अनियंत्रित और क्रूर’ लाठी चार्ज करने के आरोपों पर आधारित है।
पृष्ठभूमि और घटना का विस्तार
शिकायतकर्ता, भोपाल के सुनील अहिरवार ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत यह शिकायत दायर की। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज के बाद कई लोगों को गंभीर चोटें आईं, जबकि प्रदर्शन को शांति पूर्ण बताया गया था। सामाजिक मीडिया पर वायरल वीडियो में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को हिरासत में लिये हुए व्यक्तियों को पीटते हुए दिखाया गया, जिससे यह आरोप लगाया गया कि यह ‘हिरासत यातना’ का मामला है।
NHRC की प्रतिक्रिया और मांगें
NHRC के सदस्य प्रीयंक कानूँगो द्वारा अध्यक्षता किए गए बेंच ने इस शिकायत को स्वीकार किया और उत्तर प्रदेश गृह सचिव एवं डीजीपी को 15 दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। शिकायतकर्ता ने स्वतंत्र जांच, वायरल वीडियो की सत्यापन, घायल प्रदर्शनकारियों के लिए त्वरित चिकित्सा सहायता, क्षतिपूर्ति और जिम्मेदार पुलिस कर्मियों के खिलाफ आपराधिक एवं विभागीय कार्रवाई की मांग की।
केस की पृष्ठभूमि
यह प्रदर्शन मेरठ में 20 वर्षीय दलीत छात्रा ललिता गौतम की हत्याकांड से जुड़ा था। ललिता 15 मई को कॉलेज जाने के बाद गायब हो गई और बाद में गन्ने के खेत में मृत पाई गई। पुलिस ने उसके कथित प्रेमी अंकुश कुमार को हत्या का आरोप लगा कर गिरफ्तार किया, लेकिन परिवार ने पुलिस की जांच को प्रश्नवाचक बना दिया और सभी संबंधित व्यक्तियों को पकड़ने की मांग की।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि NHRC की रिपोर्ट में पुलिस के अत्यधिक बल के प्रमाण मिलते हैं, तो यह दलीत समुदाय के प्रति न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है। साथ ही, यह घटना उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक प्रदर्शन और पुलिस के जवाबी उपायों पर व्यापक चर्चा को जन्म देगी।