गुड़गांव में तीन साल की बच्ची के यौन शोषण मामले में विशेष जांच टीम (SIT) की रिपोर्ट को माता‑पिता ने पक्ष‑पातपूर्ण बताया और अदालत में पुनः जांच का अनुरोध किया। मामला 16 जुलाई को सुनवाई के लिए तय है।

मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • माता‑पिता ने SIT की जांच को पक्ष‑पातपूर्ण कहा
  • साक्ष्य संग्रह और डिजिटल डेटा की कमी को उजागर किया
  • सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित

गुड़गांव के एक कॉन्डोमिनियम में तीन साल की बच्ची के यौन शोषण के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने मामले को विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपा था। अब बच्ची के पिता ने गुरुग्राम की अदालत में एक विरोधी याचिका दायर कर SIT की चार्जशीट को अस्वीकार कर आगे की जांच की मांग की है।

पक्ष‑पातपूर्ण जांच का आरोप

विरोधी याचिका में कहा गया है कि SIT ने "एकतरफ़ा, अधूरी और अविश्वसनीय" जांच की, जिससे तीन प्रमुख संदिग्धों—जिसमें परिवार की घरेलू मदद भी शामिल है—को बरी कर दिया गया, जबकि बच्ची ने कई अवसरों पर उन्हें पहचाना था। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि चार्जशीट में यह उल्लेख नहीं है कि बच्ची को कोई भ्रम या दबाव का सामना नहीं करना पड़ा, जिससे रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

डिजिटल सबूत और फॉरेंसिक त्रुटियों की कमी

जांच में उपयोग की गई डिजिटल गेट‑मैनेजमेंट एप्लीकेशन के डेटा को सीमित अवधि के बाद हटा दिया गया, और SIT ने पुराना सर्वर डेटा सुरक्षित करने की कोई कोशिश नहीं की। इसके अलावा, प्रारंभिक स्थानीय पुलिस ने अपराध स्थल को तुरंत सुरक्षित नहीं किया, जिससे फॉरेंसिक सबूत खोने की संभावना बनी। यह तथ्य याचिका में दोहराया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रारम्भिक जांच में भी गंभीर चूक हुई थी।

भविष्य की दिशा और संभावित प्रभाव

यदि अदालत SIT की चार्जशीट को खारिज कर पुनः जांच का आदेश देती है, तो यह न केवल इस विशेष मामले में बल्कि पूरे NCR क्षेत्र में बाल यौन शोषण मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। न्यायिक निगरानी और साक्ष्य‑आधारित जांच के महत्व को फिर से रेखांकित किया जाएगा, जिससे भविष्य में समान मामलों में तेज़ और पारदर्शी कार्रवाई की उम्मीद की जा सकती है।

सुनवाई 16 जुलाई को निर्धारित है, और इस निर्णय के आधार पर आगे की कार्यवाही तय होगी।